
Amritsar Completes 99.31% of Paddy Procurement : अमृतसर। जिले की मंडियों में धान की खरीद और पराली प्रबंधन की समीक्षा करते हुए प्रभारी सचिव कमल किशोर यादव ने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और समय पर धान का उठान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अब तक मंडियों में पहुंची 1,64,398 मीट्रिक टन धान की फसल में से 1,63,257 मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। वहीं, किसानों को पराली जलाने से रोकने और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने में कोई कठिनाई न हो और खरीद व उठान का काम सुचारू रूप से हो। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने बताया कि कल शाम तक अमृतसर जिले की मंडियों में 1,64,398 मीट्रिक टन धान आ चुका था, जिसमें से सरकारी खरीद एजेंसियों ने 1,63,257 मीट्रिक टन धान खरीदा है। इस प्रकार, मंडियों में आए कुल धान का 99.31 प्रतिशत खरीदा जा चुका है और केवल 1,141 मीट्रिक टन धान की खरीद बाकी है।
उन्होंने बताया कि मंडियों से धान का उठान भी चल रहा है और अब तक 44,241 मीट्रिक टन धान उठाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी मंडियों का दौरा करके खरीद व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसानों को कोई असुविधा न हो। श्री कमल किशोर यादव ने खरीद एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मंडियों में दैनिक बोली के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों की फसल की खरीद सुनिश्चित करें।
उन्होंने जोर दिया कि खरीद प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए और खरीदे गए धान का समय पर उठान किया जाना चाहिए ताकि मंडियों में फसल का जमावड़ा न हो और किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई कठिनाई न हो। धान की पराली के प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा करते हुए, प्रभारी सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाएं ताकि किसानों को धान की पराली जलाने के बुरे प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जा सके और उन्हें वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों को धान के पराली के सही निपटान के लिए उपलब्ध कृषि मशीनों और उपकरणों के इस्तेमाल के बारे में ज़रूरी जानकारी दें। उन्होंने ज़िले में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि मशीनों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने ज़िला प्रशासन की टीमों को निर्देश दिया कि वे गांवों का दौरा करें, किसानों से सीधे बात करें और फसल अवशेषों के सही प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाएं।
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