दूसरी ओर शहर के विभिन्न अस्पतालों के वार्डों और ग्रामीण सामुदायिक केंद्रों में कभी वर्जित (संकोचपूर्ण) माने जाने वाले विषयों पर खुलकर और संवेदनशीलता से चर्चा हुई—यह स्वीकार करते हुए कि मानसिक स्वास्थ्य भी जीवन के लिए उतना ही अनिवार्य है जितनी कि सांसें। 10 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के दौरान, अमृतसर जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (DLSA), अमृतसर के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व सामुदायिक जागरूकता अभियान का साक्षी बना।
यह भली-भांति समझते हुए कि किसी भी समाज की भावनात्मक सुदृढ़ता अपनी बेटियों को दिए जाने वाले मान-सम्मान व सुरक्षा से अभिन्न रूप से जुड़ी है, समर्पित कानूनी टीमों ने लोगों की चौखट तक न्याय, गरिमा और संबल पहुंचाने के उद्देश्य से सघन जागरूकता अभियान चलाए। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: चुप्पी की बेड़ियों को तोड़ना प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पहली बार 1992 में रिचर्ड हंटर के नेतृत्व में ‘वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ’ द्वारा शुरू किया गया था।
जो कभी एक वैश्विक शैक्षणिक अभियान के रूप में शुरू हुआ था, वह आज भावनात्मक आघातों को समझने, सामाजिक बहिष्कार को समाप्त करने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एक अविभाज्य मानवाधिकार के रूप में स्थापित करने का एक तात्कालिक अंतरराष्ट्रीय संकल्प बन चुका है। शनिवार को डीएलएसए (DLSA) अमृतसर ने इस महत्वपूर्ण दिवस को “मजबूत मन, स्वस्थ कल” (Stronger Minds, Healthier Tomorrows) के मार्गदर्शक संदेश के तहत मनाया।
अनुभवी पैनल अधिवक्ताओं (Empaneled Advocates) और प्रशिक्षित पैरा-लीगल वालंटियर्स (PLVs) से युक्त 10 समर्पित कानूनी साक्षरता टीमों ने जिले के प्रमुख व संवेदनशील स्थानों पर जागरूकता शिविर आयोजित किए। ये कार्यक्रम सरकारी मानसिक अस्पताल, अमृतसर सहित प्रमुख उप-मंडलों और ग्रामीण क्षेत्रों जैसे अजनाला, बाबा बकाला, वेरका, वल्लाह, कत्थूनंगल, मेहता, लोपोके, सठियाला और रईया में आयोजित किए गए। इन टीमों ने मरीजों, तीमारदारों, युवाओं और बुजुर्गों से सीधा संवाद साधा और समुदाय से अपील की कि वे मानसिक तनाव को सामान्य मानवीय स्थिति के रूप में स्वीकार करें, समय पर चिकित्सीय व संस्थागत परामर्श लें और मानसिक समस्याओं से जुड़ी पुरातन हिचक व शर्म को त्यागें।
चर्चाओं के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक सशक्त जीवन और खुशहाल परिवार की आधारशिला है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस: बेटियों के सामर्थ्य और अधिकारों का संरक्षण चौबीस घंटे पश्चात, 11 अक्टूबर को लैंगिक समानता, मानवीय गरिमा और बाल अधिकारों की दिशा में ध्यान केंद्रित करते हुए ‘अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस’ मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2011 में प्रस्ताव 66/170 के माध्यम से स्थापित और पहली बार 2012 में मनाए गए इस दिवस का उद्देश्य वर्ष 1995 के ऐतिहासिक बीजिंग घोषणापत्र की प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करना है।

