
चंडीगढ़: अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला ने हाल ही में अमृतसर के मजीठा में हुई जहरीली शराब त्रासदी को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर तीखा हमला किया है। इस त्रासदी में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए औजला ने कहा, “सरकार का तथाकथित ‘ड्रग्स पर युद्ध’ जमीनी हकीकत से पूरी तरह अलग है। अगर यह प्रभावी होता, तो यह त्रासदी नहीं होती।”
मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए औजला ने मांग की कि “मुख्यमंत्री को इन मौतों के लिए पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए तथा जिम्मेदार अधिकारियों से इस्तीफा मांगना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद सरकार द्वारा कार्रवाई न करने से पंजाब में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के गठजोड़ को बढ़ावा मिला है।
2020 में 120 मौतें और 2024 में संगरूर में 20 मौतें सहित अतीत में हुई इसी तरह की त्रासदियों का जिक्र करते हुए औजला ने पारदर्शिता और सजा की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “कानून शक्तिहीन हो गया है। अपराधियों में कोई डर नहीं है।”
औजला ने आगे दावा किया कि सरकार की शराब मूल्य नीति गरीबों को सस्ती और नकली शराब पीने के लिए मजबूर कर रही है।
उन्होंने कहा, “अच्छी गुणवत्ता वाली शराब की कीमतें बहुत अधिक हैं और गरीबों को जहर खरीदने के लिए मजबूर करके मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।” उन्होंने मीडिया को देशी शराब के ब्रांडों के न्यूनतम और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर दिखाया।
उन्होंने ड्रग माफियाओं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आबकारी विभाग के अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ का भी आरोप लगाया।
औजला ने कहा, “यह मिलीभगत पंजाब को बर्बाद कर रही है। यहां तक कि मजीठा में भी शराब पुलिस थाने से सिर्फ 200 मीटर की दूरी पर बेची जा रही थी।” उन्होंने इसे पुलिस के मौन समर्थन का स्पष्ट मामला बताया।
कांग्रेस सांसद ने कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच का गठन किया जाए, ताकि अवैध शराब त्रासदी, नशीली दवाओं से संबंधित मौतों और अवैध शराब व्यापार की जांच की जा सके।
उन्होंने केन्द्र सरकार से राज्य में नशीले पदार्थों और नकली शराब के पूरे गठजोड़ की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की भी अपील की।
औजला ने जोर देकर कहा, “जांच से ‘बड़ी मछलियों’ का पर्दाफाश होना चाहिए – जो अधिक कीमत पर शराब बेचने, अनियंत्रित इथेनॉल की आवाजाही और इन अवैध व्यापारों को राजनीतिक संरक्षण देने के पीछे हैं।” उन्होंने राज्य में अनियंत्रित इथेनॉल खेप के प्रवेश पर भी चिंता जताई तथा सवाल उठाया कि खुफिया एजेंसियां इस तरह की गतिविधि पर ध्यान क्यों नहीं दे पातीं।
अंत में, औजला ने अपनी आवाज बुलंद करने की कसम खाई: “मैं पीछे नहीं हटूंगा। अमृतसर और पंजाब इससे बेहतर के हकदार हैं। हर ईमानदार अधिकारी, नेता और नागरिक को अब खड़ा होना चाहिए और जवाबदेह होना चाहिए, अन्यथा पंजाब की जड़ें नशीली दवाओं और जहर के बोझ तले सड़ती रहेंगी।”
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