Ardas for the release of imprisoned Sikhs : अमृतसर। देश की विभिन्न जेलों में लंबे समय से बंद बंदी सिखों की रिहाई और उनके उच्च मनोबल के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से विशेष अरदास कार्यक्रम आयोजित किए गए। SGPC के अधीन ऐतिहासिक गुरुद्वारों में श्री अखंड पाठ साहिब और शिक्षण संस्थानों में श्री सुखमनी साहिब के पाठ करवाए गए।
इस दौरान सिख बंदियों की चढ़दी कला के लिए अरदास करते हुए सरकार से उनकी रिहाई और लंबित मामलों पर गंभीरता से निर्णय लेने की मांग उठाई गई।
यहां सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से जुड़े गुरुद्वारा श्री मंझी साहिब दीवान हॉल में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद, हजूरी रागी जत्थों ने गुरबानी कीर्तन किया और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह और सिंह साहिब ज्ञानी राजदीप सिंह ने संगत के साथ अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर बोलते हुए, SGPC सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता ने कहा कि जेलों में अपना लंबा समय बिताने वाले सिखों की रिहाई का मुद्दा सिख समुदाय की भावनाओं से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि ये वे बंदी सिख हैं जिन्होंने सिखों पर हुए अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना था। उन्होंने कहा कि भारतीय कानून के तहत मिली सज़ा की अवधि से कहीं ज़्यादा समय उन्होंने जेलों में बिताया है। उन्होंने कहा कि सरकारें सिखों की भावनाओं से जुड़े इन अहम मुद्दों को लेकर हमेशा उदासीन रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की अपील के बावजूद, सरकार ने भाई बलवंत सिंह राजोआना की सज़ा कम करने के मामले में कोई फ़ैसला नहीं लिया है, जो उनके कानूनी अधिकारों के लिहाज़ से भी गलत है।
इसी तरह भाई जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए पैरोल नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जब कहीं सुनवाई नहीं होती, तो सिख हमेशा गुरु का सहारा लेते हैं। इसी के तहत, आज SGPC की अंतरिम समिति के फ़ैसले के अनुसार सभी गुरुद्वारों में ‘श्री अखंड पाठ साहिब’ का आयोजन किया गया। उन्होंने सरकार से सिखों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ‘बंदी सिखों’ के मामले में फ़ैसला लेने को कहा।

