
Artist Creates Jhota Statue in 72 Hours : मोगा। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मौत से आहत कलाकार इकबाल सिंह गिल ने उन्हें अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि दी है।
मोगा जिले के गांव मानूके गिल निवासी कलाकार ने लगातार 72 घंटे मेहनत करके झोटा का स्टेच्यू तैयार किया, जिस पर करीब 50 से 60 हजार रुपये खर्च हुए। किसान परिवार से संबंध रखने वाले इकबाल सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य झोटा के संघर्ष को याद रखने के साथ युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश देना है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा को तैयार करते समय उनके मन में यही विचार था कि पंजाब के किसी भी परिवार को अपने नौजवान को इस तरह खोने का दुख न सहना पड़े। कलाकार ने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा और समाज की बेहतरी के लिए काम करने की अपील की। कलाकार इकबाल सिंह गिल ने बातचीत के दौरान बताया कि जब उन्हें परमिंदर सिंह झोटा की मौत की खबर मिली तो उन्हें दुख हुआ।
उन्होंने कहा कि पंजाब पहले ही नशे के कारण अपने कई नौजवानों को खो चुका है। ऐसे में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक युवक का दुनिया से चले जाना समाज के लिए बड़ी क्षति है। उनके मन में यह सवाल उठा कि आखिर ऐसे हालात क्यों बन रहे हैं, जिनमें नशे के खिलाफ संघर्ष करने वाले युवाओं को भी अपनी जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके मन में यह विचार आया कि किसी युवा का स्टेच्यू बनाने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए। वह तो यही प्रार्थना करते हैं कि पंजाब के किसी भी नौजवान और उसके परिवार को ऐसे दुख का सामना न करना पड़े।
परमिंदर सिंह झोटा की मौत के बाद उनके दोस्तों और अन्य लोगों के फोन आने लगे। कई लोगों ने उनकी याद में प्रतिमा तैयार करने का सुझाव दिया। इसके बाद उन्होंने स्टेच्यू बनाने का फैसला किया और इसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। तीन दिन में तैयार की प्रतिमा, 50 से 60 हजार रुपये आया खर्च इकबाल सिंह गिल ने बताया कि उन्होंने लगातार तीन दिन तक मेहनत करके यह प्रतिमा तैयार की। इसे रंग करने का काम भी उन्होंने स्वयं किया। उनके अनुसार, स्टेच्यू तैयार करने पर करीब 50 से 60 हजार रुपये की लागत आई है।
उन्होंने कहा कि यह परमिंदर सिंह झोटा के प्रति उनकी व्यक्तिगत श्रद्धांजलि है। परमात्मा ने उन्हें जो कला प्रदान की है, उसी के माध्यम से वह झोटा के संघर्ष के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करना चाहते हैं। कलाकार ने बताया कि वह इससे पहले भी कई प्रसिद्ध हस्तियों के स्टेच्यू बना चुके हैं। इनमें बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियों की प्रतिमाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिमा बनाना केवल कला का काम नहीं होता, बल्कि उसके साथ भावनाएं भी जुड़ी होती हैं।
खासकर जब किसी युवा की मौत के बाद उसकी याद को संजोने के लिए प्रतिमा तैयार की जाए तो यह काम भावनात्मक रूप से और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश इकबाल सिंह गिल ने कहा कि किसी व्यक्ति का स्टेच्यू केवल उसकी तस्वीर या पहचान नहीं होता, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का माध्यम भी बन सकता है। जब लोग परमिंदर सिंह झोटा की प्रतिमा देखेंगे तो उन्हें नशे के खिलाफ किए गए संघर्ष की याद आएगी और वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी के बारे में सोचने के लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नशे और अन्य गलत गतिविधियों से दूर रहें, अच्छी शिक्षा हासिल करें तथा समाज की बेहतरी के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे कार्य करने वाले लोगों की कद्र उनके जीवित रहते हुए भी होनी चाहिए। यदि संघर्ष करने वाले लोगों को समय रहते समाज का सहयोग और प्रोत्साहन मिले तो कई दुखद परिस्थितियों को पैदा होने से रोका जा सकता है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं कलाकार ने कहा कि नशे जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपना कर्तव्य समझना होगा।
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