Bans Paddy Stubble Burning : मोगा। धान की पराली जलाने पर जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला मजिस्ट्रेट सागर सेतिया ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है।
यह पाबंदी तत्काल प्रभाव से लागू होकर 14 नवंबर 2026 तक जारी रहेगी। आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट सागर सेतिया ने बताया कि धान की पराली को आग लगाने से वातावरण में हानिकारक धुआं और गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसका मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से खेतों में मौजूद कीट-पतंगे, पक्षी और अन्य जीव-जंतु प्रभावित होते हैं तथा मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से उठने वाला धुआं सड़कों पर दृश्यता कम कर देता है। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए किसानों से अपील की गई है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय इसके उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध करवाए जा रहे वैज्ञानिक तरीकों और कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करें। सागर सेतिया ने बताया कि पंजाब सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग की ओर से समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के तहत धान की पराली न जलाने संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं।
इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से यह पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने किसानों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनरी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। जिला प्रशासन की ओर से भी किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने संबंधी प्रतिबंधित गतिविधि को रोकने के लिए आदेशों की सख्ती से पालना करवाई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

