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पराली प्रबंधन से बचेगा पर्यावरण, बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता

Bathinda DC Urges Farmers to Avoid Stubble Burning : बठिंडा। कोठागुरु गांव के दौरे के दौरान, डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने किसानों से धान की पराली न जलाने और पराली के सही प्रबंधन के जरिए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिसका बुरा असर इंसानों, जानवरों, पक्षियों और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर पड़ता है।

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को खराब करता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को काफी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, फसल के अवशेष (पराली) जलाने से मिट्टी में मौजूद फायदेमंद सूक्ष्मजीव और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे आधुनिक कृषि मशीनों का इस्तेमाल करके खेतों में ही पराली का सही प्रबंधन करें।

सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर और अन्य कृषि उपकरणों की मदद से पराली को मिट्टी में मिलाया जा सकता है, या फिर इसके गट्ठर बनाकर इसे अन्य उपयोगी कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन न केवल पर्यावरण को साफ रखने में मदद करता है, बल्कि इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, नमी बनी रहती है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी कायम रहती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण को बचाने और आने वाली पीढ़ियों की सेहत का ध्यान रखते हुए पराली न जलाएं, और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों में सहयोग करें।

इस मौके पर बठिंडा की मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसानों को पराली प्रबंधन के फायदों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि खेतों में ही पराली का प्रबंधन करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पराली को जलाने के बजाय कृषि विभाग की सलाह मानें और उपलब्ध कृषि मशीनों का इस्तेमाल करके इसका सही प्रबंधन करें।

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