Site icon Dainik Savera Times

सूखी जलधाराओं में लौटा पानी: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार ने नहरों और सिंचाई व्यवस्था को दी नई जिंदगी

Bhagwant Mann government given new life canals irrigation system

Bhagwant Mann government given new life canals irrigation system

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य की छोड़ी गई नहरों और जलधाराओं को फिर से जीवित करने में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। खेती पर निर्भर पंजाब के लिए सिंचाई सबसे अहम जरूरत है, और इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने पिछले तीन सालों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर खास फोकस किया है।

सिंचाई पर रिकॉर्ड खर्च

2022 में सत्ता में आने के बाद से पंजाब सरकार ने नहरों और जलधाराओं पर 4,557 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके मुकाबले 2019 से 2022 के बीच इस काम पर केवल 2,046 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इससे साफ है कि मौजूदा पंजाब सरकार ने सिंचाई को अपनी प्राथमिकता बनाया है

आखिरी छोर तक पानी पहुंचाने की कोशिश
पंजाब सरकार का लक्ष्य है कि पानी खेत के आखिरी छोर तक पहुंचे। इसके लिए 1,600 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके लिए 830 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनमें से 350 करोड़ रुपये पहले ही खर्च हो चुके हैं। पाइपलाइन और पक्की जलधाराओं से पानी की बर्बादी रुकेगी और किसानों को नियमित सिंचाई मिलेगी।

30-40 साल से बंद जलधाराएं फिर से बहाल

पंजाब सरकार ने 2022 के बाद से18,349 जलधाराओं को बहाल किया है। इनकी कुल लंबाई 6,955 किलोमीटर से ज्यादा है। ये जलधाराएं पिछले 30 से 40 सालों से बंद पड़ी थीं। इसके अलावा 79 नहरों (545 किमी) को दोबारा चालू किया गया। इससे 41,135 एकड़ जमीन को फिर से नहर सिंचाई का लाभ मिला।

सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों पर खास ध्यान

पंजाब सरकार ने पाकिस्तान सीमा के पास फाजिल्का जिले में लूथर नहर प्रणाली को बहाल किया। इसमें 12 नहरें (213 किमी) शामिल हैं। इसके अलावा तरनतारन जिले में 23 नहरें बहाल की गईं। होशियारपुर के कंडी इलाके में भूमिगत पाइपलाइनें ठीक की गईं। मलेरकोटला में रोहिरा, कंगनवाल और डेहलों नहरों का विस्तार पूरा किया गया।

मनरेगा फंड का बेहतर इस्तेमाल

पंजाब सरकार ने सिंचाई ढांचे को सुधारने के लिए मनरेगा फंड का भी ज्यादा उपयोग किया है, एफ वाई 2023-24 में खर्च बढ़कर 228 करोड़ रुपये। एफ वाई 2024-25 में यह और बढ़कर 270 करोड़ रुपये हो गया है। नहरों और नालों की सफाई और मरम्मत से पिछले पांच सालों में खरीफ सीजन में 12% से ज्यादा अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल संभव हुआ।

पहली बार गेहूं सीजन में पूरा पानी इस्तेमाल

पंजाब सरकार के मुताबिक अब गेहूं के मौसम में 100% पानी का उपयोग किया जा रहा है। पहले पानी की पूरी हिस्सेदारी का इस्तेमाल नहीं हो पाता था। अब सरकार का फोकस पक्की (ईंटों वाली) जलधाराओं और पाइपलाइन वाली खालों के निर्माण पर है। धान की बुवाई से पहले (अप्रैल-मई) और कटाई के बाद (अक्टूबर-नवंबर) बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

एफ वाई 2025-26 के लिए बड़ा लक्ष्य

वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 760 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं। 3,400 किलोमीटर लंबी पक्की जलधाराएं और पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं।

खेती और पानी की सुरक्षा की ओर मजबूत कदम

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार की यह पहल किसानों को भरोसेमंद सिंचाई दे रही है। भूजल पर निर्भरता कम कर रही है और पंजाब की खेती को लंबे समय के लिए सुरक्षित बना रही है। सूखी पड़ी जलधाराओं में पानी की वापसी सिर्फ सिंचाई नहीं, बल्कि पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन की कहानी है।

Exit mobile version