Last Updated: October 10, 2026

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भाई कन्हैया जी पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को अनुचित टिप्पणी नहीं करनी चाहिए : परगट सिंह

January 27, 2026

भाई कन्हैया जी पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को अनुचित टिप्पणी नहीं करनी चाहिए : परगट सिंह

​चंडीगढ़: पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा भाई कन्हैया जी के संदर्भ में दी गई टिप्पणी एक अत्यंत खेदजनक घटना है, जिसने सिख समुदाय की सामूहिक चेतना को ठेस पहुंचाई है। मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ विवादास्पद एसवाईएल (SYL) नहर मुद्दे पर अपनी हालिया बैठक के दौरान, नि:स्वार्थ सेवा और मानवता के प्रतीक भाई कन्हैया जी की पवित्र विरासत का अनुचित उदाहरण दिया। एक ऐसे संत, जिनकी युद्धकालीन करुणा सभी भेदभावों से परे थी, उनका इस तरह राजनीतिकरण करना न केवल अनुचित है, बल्कि सिख धर्म के आध्यात्मिक लोकाचार का घोर अपमान भी है।

भाई कन्हैया जी सिख इतिहास के एक महान व्यक्तित्व

भाई कन्हैया जी सिख इतिहास के एक महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने युद्ध के मैदानों में मित्र या शत्रु का भेदभाव किए बिना घायल सैनिकों की सेवा की और उन्हें पानी पिलाया। उनकी विरासत गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है। इस पावन स्मृति को अंतर-राज्यीय जल विवादों के राजनीतिक अखाड़े में घसीटना और पंजाब के कड़े विरोध के बीच इसे एक बयानबाजी के रूप में इस्तेमाल करना करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान है। इस तरह की टिप्पणियां भाई कन्हैया जी के योगदान की गरिमा को कम करती हैं।

एसवाईएल नहर पर पंजाब का रुख

एसवाईएल नहर पर पंजाब का रुख स्पष्ट है: हमारे राज्य का अस्तित्व रावी-ब्यास के पानी की हर बूंद पर टिका है, जो हमारी कृषि, किसानों की आजीविका और 3 करोड़ से अधिक पंजाबियों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। इस गंभीर मुद्दे पर संवैधानिक और तर्कसंगत वकालत की आवश्यकता है, न कि ऐसी ओछी बयानबाजी की जो पूजनीय महापुरुषों का उपहास उड़ाती हो। मुख्यमंत्री मान का यह आचरण न केवल पंजाब के पक्ष को कमजोर करता है, बल्कि इस विवाद में हमारे नैतिक पक्ष को भी नुकसान पहुंचाता है।

परगट सिंह ने इन टिप्पणियों को राज्य के सर्वोच्च पद की गरिमा के प्रतिकूल बताते हुए इनकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये बयान सांस्कृतिक संवेदनाओं के प्रति लापरवाह रवैये को दर्शाते हैं। “आप” सरकार का शासन के बजाय नाटकीय बयानबाजी पर जोर देना केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाता है।

अपने बयान वापस लें

सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया है कि वे तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, अपने बयान वापस लें और विभाजनकारी बयानबाजी के बजाय तर्कसंगत विमर्श के माध्यम से एसवाईएल गतिरोध को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हों। सिख समुदाय इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेगा। पंजाब की एकता और इसकी पवित्र विरासत को कभी भी राजनीतिक खेल का मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए। हम सब मिलकर अपने अधिकारों, अपनी नदियों और अपने श्रद्धेय संतों की मर्यादा की रक्षा करेंगे।

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