अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब तरनतारन साहिब के कुछ प्लॉटों को कम कीमत पर बेचने के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह (Ranjit Singh) द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि भाई रणजीत सिंह को सिख संस्था के खिलाफ इस तरह के निराधार बयान नहीं देने चाहिए।
भाई रणजीत सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव प्रताप सिंह और उप सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि यह एक ऐसी जगह है जिसका गुरुद्वारा साहिब द्वारा उपयोग नहीं किया जा रहा था और लोगों द्वारा अतिक्रमण किए जाने के कारण शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की इन-हाउस कमेटी ने प्रॉपर्टी सब-कमेटी की सिफारिशों पर इसे बेचने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी ने बाकायदा विज्ञापन देकर इस जगह को खुली बोली के जरिए बेचा है।
उन्होंने कहा कि यह जगह शहर के नजदीक जरूर है, लेकिन तंग गलियों के कारण इस जगह का मार्कीट रेट कम है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी ने अलविंदरपाल सिंह पखोके, खुशिवंदर सिंह भाटिया, अमरजीत सिंह भलाईपुर पर आधारित सब-कमेटी बनाकर नियमों के अनुसार इस जगह की खुली बोली करवाई है। उन्होंने कहा कि अगर इस जगह की कीमत ज्यादा होती तो शिरोमणि कमेटी को पहले भी कई बार लगाई गई बोलियां ग्राहकों द्वारा बोली न लगाने के कारण रद्द नहीं करनी पड़ती। उन्होंने कहा कि भाई रणजीत सिंह का यह कहना कि शिरोमणि कमेटी ने 60 लाख की जगह 16 लाख में बेची, किसी भी तरह से जायज नहीं है।
कीमत कम लगती है तो 55 लाख रुपए में खरीद ले भाई रणजीत सिंह : एसजीपीसी पदाधिकारियों ने कहा कि अगर भाई रणजीत सिंह को यह कीमत कम लगती है तो वह 60 लाख में से 55 लाख ही गुरुद्वारा साहिब में जमा करवा दें तो एसजीपीसी बोली रद्द करके जगह उन्हें सौंप देगी। एसजीपीसी पदाधिकारियों ने संगत से भी इस तरह के निराधार और भ्रामक बयानों से सावधान रहने की अपील की।
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