फरीदकोट: बाबा फरीद यूनिवर्सिटी द्वारा फरीदकोट में आयोजित फार्मेसी ऑफिसर भर्ती एग्जाम के दौरान नकल करने वाले एक बहुत ही ऑर्गनाइज्ड और हाई-टेक इंटर-स्टेट गैंग का पता तब चला जब यूनिवर्सिटी के फ्लाइंग स्क्वॉड ने अलग-अलग एग्जाम सेंटर्स पर हाई-टेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके नकल करते हुए करीब 28 कैंडिडेट्स को पकड़ा, जब इन सभी कैंडिडेट्स को यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने फरीदकोट पुलिस को सौंपा, तो पुलिस जांच में जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस डिपार्टमेंट की ओर से जारी एक ऑफिशियल लिखित बयान में कहा गया है कि इस मामले में अब तक 7 मुख्य साजिशकर्ताओं और 28 कैंडिडेट्स को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने उनके पास से 27 बैटरी से चलने वाले वायरलेस कॉपी करने वाले डिवाइस भी बरामद किए हैं। यह गैंग पेन कैमरा और रियल-टाइम डिक्टेशन के जरिए नकल कर रहा था।

19-07-2026 को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक हुई एग्जाम शुरू होने के कुछ ही मिनटों के अंदर आरोपियों ने पेन कैमरा और मोबाइल फोन जैसे मॉडर्न जासूसी डिवाइस का इस्तेमाल करके साजिश को अंजाम देना शुरू कर दिया। फिरोजपुर के एक एग्जाम सेंटर पर एग्जाम दे रहे कैंडिडेट आयुष (रोल नंबर 426347) ने अपने पास छिपे पेन कैमरे से क्वेश्चन पेपर की तस्वीरें लीं और भिवानी, हरियाणा के रहने वाले साजन को WhatsApp के जरिए सुबह 11:10 बजे से 11:25 बजे के बीच भेजीं। साजन ने आगे क्वेश्चन पेपर दीपक को भेजा, जो फरीदकोट के सोसाइटी नगर में गुरमीत सिंह के घर पर बने टेम्पररी कंट्रोल रूम में मौजूद था। वहां से, मंजीत सिंह और दीपक ने वायरलेस डिवाइस के जरिए एग्जाम सेंटर में बैठे कई कैंडिडेट्स को रियल-टाइम में जवाब बताए।
अब तक की जांच में पता चला है कि क्वेश्चन पेपर पहले से लीक नहीं हुआ था और इसमें कोई सरकारी अधिकारी शामिल नहीं था। पूरी घटना एग्जाम शुरू होने के बाद रियल-टाइम में हुई। शुरुआती जांच में पता चला है कि पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड गुरमीत सिंह था, जो फाजिल्का के संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज का कर्मचारी था।

गैंग एग्जाम पास कराने के नाम पर कैंडिडेट्स से 3.5 लाख रुपये से 13 लाख रुपये तक लेता था। कई कैंडिडेट्स से सिक्योरिटी के तौर पर पोस्ट डेटेड चेक (PDC) भी लिए गए थे। यह रैकेट पूरी तरह से प्लान्ड तरीके से चल रहा था। एग्जाम वाले दिन सुबह गैंग के मेंबर फरीदकोट-कोटकपूरा रोड पर मौजूद एक होटल में इकट्ठा होते थे और वहां से खास तौर पर डिजाइन किए गए बैटरी से चलने वाले वायरलेस माइक्रो डिवाइस उन कैंडिडेट्स को बांटे जाते थे, जिन्होंने डील की थी।
अब तक फरीदकोट और फिरोजपुर से 28 कैंडिडेट्स को हिरासत में लिया गया है, जिनसे 27 गैर-कानूनी वायरलेस डिवाइस बरामद किए गए हैं। 7 मुख्य आरोपी गुरमीत सिंह, फरीदकोट का रहने वाला, मास्टरमाइंड और मुख्य सूत्रधार मंजीत सिंह, झुंझुनू, राजस्थान का रहने वाला, सलवार/आंसर टेलर दीपक, कोटपुतली-बहरोड़, राजस्थान का रहने वाला, सलवार/आंसर टेलर सतनाम सिंह, गुरुहरसहाय, पंजाब का रहने वाला, बलवंत सिंह, डोधा, हरियाणा का रहने वाला, अभियंत, भिवानी, हरियाणा का रहने वाला, सुनील कुमार, कोटपुतली-बहरोड़, राजस्थान का रहने वाला गिरफ्तार किए गए हैं।
यह सफल ऑपरेशन पंजाब पुलिस की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को दिखाता है। स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजिकल सर्विलांस और रियल-टाइम इंटेलिजेंस पर आधारित इस ऑपरेशन ने ईमानदार उम्मीदवारों के अधिकारों और योग्यता की रक्षा की है। गैंग के बाकी सदस्यों, खासकर भिवानी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी चल रही है। इस मामले में इंडियन पीनल कोड (IPC) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जा रही है। साथ ही फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और दूसरे संभावित साथियों की भूमिका की भी पूरी जांच चल रही है।
अब तक की जांच के मुताबिक, इस पूरे मामले में एग्जाम एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े किसी भी अंदरूनी अधिकारी या व्यक्ति की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। एग्जाम सिस्टम को इस तरह से डिजाइन और लागू किया गया है कि यह अंदरूनी दखल, बिना इजाज़त पहुंच या किसी भी तरह की हेराफेरी से सुरक्षित रहे और सभी कैंडिडेट्स के लिए निष्पक्षता और बराबरी पक्की हो सके।
इस पूरे मामले के बारे में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रजिस्ट्रार अरविंद कुमार ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने एक स्टूडेंट को ब्लूटूथ डिवाइस से नकल करते हुए पकड़ा, जिसके बाद उन्हें पुलिस से इनपुट मिला कि इस तरह से और भी कई बच्चे नकल करते हुए पकड़े जा सकते हैं, जब उन्होंने हर सेंटर पर पूरी जांच की तो कुल 28 युवक ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़े गए जो नकल कर रहे थे। इसके साथ ही बाहर से उनका साथ देने वाले लोग भी पकड़े गए हैं, जो राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही रजिस्ट्रार ने कहा कि किसी भी स्टूडेंट को डरने और किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। यूनिवर्सिटी सरकार के साथ मिलकर जो भी फैसला लेगी, वह स्टूडेंट्स के हित में होगा।
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