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जेलों में मुलजिमों को सुविधाएं कैसे मिलीं? मजीठिया ने मांगी जांच

Bikram Majithia Alleges Political Protection for Accused : अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब की जेल व्यवस्था, पुलिस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच कथित गठजोड़ को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विचाराधीन कैदी जतिंदर सिंह उर्फ जतिंदर सरपंच और अन्य आरोपियों से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि न्यायिक हिरासत के दौरान मुलजिम निजी अस्पतालों व होटलों में कैसे रह सकते हैं और उन तक हथियार व गोला-बारूद कैसे पहुंच सकते हैं। मजीठिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश किए गए पुलिस के हलफनामों, गिरफ्तारी की तारीखों और जेल प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने संबंधित पुलिस, जेल अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। ये आरोप मजीठिया द्वारा लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत विवरण में नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर अदालत द्वारा किसी मुलजिम को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा जाता है तो वह जेल की बजाय निजी अस्पतालों और होटलों में कैसे रह सकता है, निजी गाड़ियों में कैसे घूम सकता है और उसके पास हथियार और गोला-बारूद कैसे पहुंच सकते हैं? मजीठिया ने कहा कि जतिंदर सिंह उर्फ जतिंदर सरपंच जो आम आदमी पार्टी का लीडर भी है और विचाराधीन कैदी है, इसी तरह गुरदेव सिंह, कुलतावर सिंह जो भगोड़े हैं जिनके संबंध ‘आप’ के बड़े नेताओं से जुड़े मामले में सामने आए तथ्य पंजाब की कानून-व्यवस्था, जेल प्रबंध और पुलिस की जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुलजिम को कथित राजनीतिक संरक्षण हासिल था और पुलिस व जेल प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच होना लाजिमी है। मजीठिया ने बताया कि उनके द्वारा सामने लाए गए मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही कार्रवाई, पुलिस द्वारा दिए हलफनामे और मुलजिम की गिरफ्तारी व जेल में दाखिले से संबंधित तारीखों की जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, हाईकोर्ट में पेश किए गए पुलिस के बयानों और जमीनी हालातों के बीच कथित विरोधाभास की गंभीरता से पड़ताल जरूरी है जिसमें अदालतों को भी मिसलीड किया गया है।

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने अदालत को यह बताया था कि मुलजिम को गिरफ्तार करके पेश कर दिया गया है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह अगले 9 दिनों में कहां रहा, उसे निजी अस्पताल में किस अधिकार के तहत रखा गया और जेल प्रशासन ने उसे तुरंत ज्यूडिशियल कस्टडी में क्यों नहीं लिया। मजीठिया ने आरोप लगाया कि मुलजिम को कथित तौर पर चंडीगढ़ के हेवन होटल में ठहराया गया और निजी वाहन के जरिए ले जाया गया। उन्होंने इस मामले में गुरसेवक सिंह से संबंधित वाहन के उपयोग, पुलिस मुलाजिमों की मौजूदगी और मुलजिम को दी गई सुविधाओं की जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि अगर ये तथ्य सही साबित होते हैं तो यह ज्यूडिशियल कस्टडी और पुलिस नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। उन्होंने आगे कहा कि चंडीगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले और हथियारों की बरामदगी संबंधी विवरणों ने और भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मजीठिया के अनुसार, मामले में जतिंदर सिंह, गुरदेव सिंह और कुलतार सिंह के नाम सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि हथियारों, मैगजीनों और कारतूसों की बरामदगी संबंधी दर्ज विवरणों की जांच करके यह पता लगाया जाना चाहिए कि हथियार किसके थे, किससे मिले और ज्यूडिशियल कस्टडी के दौरान वे मुलजिम तक कैसे पहुंचे।

मजीठिया ने कहा कि जेल में बंद किसी व्यक्ति द्वारा अन्य मुलजिमों को हथियार मुहैया करवाने या उन्हें इस्तेमाल करने के लिए कहने के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने पूछा कि जेल प्रशासन, संबंधित पुलिस अधिकारियों और जिम्मेदार राजनीतिक नेताओं को इस बारे में क्या जानकारी थी और उन्होंने क्या कार्रवाई की? अब चंडीगढ़ पुलिस भी इस मामले में कार्रवाई करेगी। उन्होंने इस मामले को सिर्फ एक व्यक्ति या एक पुलिस अधिकारी तक सीमित न रखने की मांग करते हुए कहा कि जांच में जेल अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी ने अदालत के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं या मुलजिम को गैर-कानूनी सुविधाएं दी हैं तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। मजीठिया ने अमृतसर देहाती के एसएसपी कंवलप्रीत चाहल, डीएसपी मजीठा, कथू नंगल थाने के एसएचओ और जेल अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जतिंदर सिंह से संबंधित मामले में पहले रहे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई और बाद में हुई नियुक्तियों के बारे में भी सवालों के जवाब मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि अमन अरोड़ा समेत आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ मुलजिम की तस्वीरें और राजनीतिक सक्रियता की भी जांच होनी चाहिए।

मजीठिया ने स्पष्ट किया कि तस्वीरें या राजनीतिक संबंध अपने आप में किसी अपराध में शामिल होने का सबूत नहीं हैं, लेकिन अगर राजनीतिक संरक्षण के आधार पर कानून से ऊपर सुविधाएं दी गई हैं तो यह लोकतंत्र और कानून के राज के लिए खतरनाक है। मजीठिया ने पंजाब की जेलों में से गैंगस्टरों द्वारा आपराधिक गतिविधियां चलाए जाने के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की साजिश और जेलों में से आपराधिक नेटवर्क चलाए जाने के बारे में पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं।

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