BJP Hits Out at Congress Over SIR Row : लुधियाना। भाजपा जिला अध्यक्ष सुनील मौदगिल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे। आयोग ने Form-6 और कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी स्पष्टीकरण जारी किया था।
अब तीनों चुनाव आयुक्तों द्वारा बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी किए जाने के बाद इन्हें मुंह छिपाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि कभी वोटिंग मशीनों और कभी देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदत बन चुकी है। एक के बाद एक चुनावों में हार के बाद लाचार इंडी गठबंधन ने अब केंद्रीय चुनाव आयोग को निशाना बनाने की चाल चली थी, जो अब पूरी तरह नाकाम हो गई है और इनका भांडा फूट गया है।
सुनील मौदगिल ने बताया कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि देशभर में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इनमें 24 जून 2025 को जारी किया गया मूल आदेश और इसके बाद विभिन्न चरणों के लिए तय की गई समय-सारणी भी शामिल है, जो पूरे चुनाव आयोग की सहमति से तय की गई थी।
विपक्षी दलों से सीधा सवाल उन्होंने चुनाव आयोग के विरोध में प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से सीधा सवाल किया कि चुनाव आयोग की बैठक और इसके बाद जारी संयुक्त प्रेस बयान के बाद क्या अब वे अपना रुख स्पष्ट करेंगे? उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने के स्पष्टीकरण ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की हकीकत सामने ला दी है।
भ्रम फैलाने की कोशिश भाजपा जिला अध्यक्ष मौदगिल ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को भी विपक्ष द्वारा SIR से जोड़कर राजनीतिक भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह पत्र न तो किसी नीतिगत मामले से संबंधित था और न ही SIR से, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यशैली से जुड़ा आंतरिक मामला था।
तथ्यों का कोई आधार नहीं उन्होंने कहा कि एक दैनिक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को आधार बनाकर विपक्ष ने चुनाव आयोग और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस और ‘आप’ को अपनी स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। फॉर्म-6 के मुद्दे पर भाजपा नेता ने कहा कि इस मामले में भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से संबंधित फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराया है, जबकि गैर-SIR अवधि के दौरान Registration of Electors Rules, 1960 के तहत पहले वाला फॉर्म ही लागू है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में कोई हेरफेर नहीं किया गया है और इस मुद्दे पर फैलाए जा रहे भ्रम का तथ्यों से कोई आधार नहीं है।

