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लुधियाना निगम की 1,408 करोड़ की कचरा प्रबंधन निविदा पर हंगामा

BJP, Workers Protest Ludhiana Civic Body’s Waste Tender : लुधियाना। लुधियाना नगर निगम की प्रस्तावित ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना की 1,408.66 करोड़ रुपये की निविदा को लेकर सोमवार को महापौर के कैंप कार्यालय के बाहर हंगामा हुआ। भाजपा नेताओं और सफाई कर्मचारियों ने निविदा रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, जबकि कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी ने भी परियोजना की लागत और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

सफाईकर्मियों के साथ भाजपा नेता और पार्षद महापौर के शिविर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने निविदा के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प हुई। सफाईकर्मी महापौर के शिविर कार्यालय के अंदर जाना चाहते थे। कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी, जो वित्त और अनुबंध समिति के सदस्य हैं, ने नगरपालिका प्रशासन पर करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन का आरोप लगाया है। भट्टी ने अपने कार्यालय से महापौर के शिविर कार्यालय तक 12 किलोमीटर नंगे पैर विरोध मार्च निकाला और महापौर के खिलाफ नारे लगाए।

पार्षद गौरव भट्टी का दावा है कि नई परियोजना के तहत कंपनी को 3,677 रुपये प्रति टन की दर से एक ही काम देने की साजिश रची जा रही है, जो वर्तमान में नगर निगम द्वारा 1,000 रुपये प्रति टन की दर से की जा रही है। इस फैसले से न केवल शहर के निवासियों पर करोड़ों रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा, बल्कि शहर की स्वच्छता प्रणाली से जुड़े लगभग 15,000 गरीब और दलित परिवारों के रोजगार का भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शहर में अपशिष्ट प्रबंधन का काम दो अलग-अलग फर्मों द्वारा किया जा रहा है। पियारा सिंह एंड संस शहर में 32 अलग-अलग स्थानों से कचरा उठाने और उसे डंपिंग साइट तक ले जाने के लिए 350 रुपये प्रति टन का शुल्क लेती है, जबकि ग्रीन टेक डंप साइट पर कचरे के निपटान के लिए 650 रुपये प्रति टन का शुल्क लेती है। इस प्रकार निगम का कुल खर्च एक हजार रुपये प्रति टन आता है। अब पुरानी व्यवस्था तोड़कर पूरे काम का ठेका एक ही कंपनी को देने के लिए तैयार है और दरें तीन गुना से अधिक बढ़ाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली एफ एंड सी की बैठक में वरिष्ठ उपमहापौर और उपमहापौर के कड़े विरोध के बाद प्रस्ताव को रोक दिया गया था, लेकिन अब इसे फिर से एजेंडे में शामिल कर लिया गया है। भट्टी ने चेतावनी दी कि घर-घर जाकर कचरा उठाने में लगे श्रमिकों का रोजगार छीनने के बाद निगम अपने वित्त को पूरा करने के लिए लोगों पर अतिरिक्त करों का बोझ डालेगा। उन्होंने नगर आयुक्त को लिखित शिकायत देकर 1,408.66 करोड़ रुपये की निविदा को तत्काल रद्द करने और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की। इस मौके पर पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और उनकी पत्नी ममता आशु भी मौजूद थीं।

निविदा रद्द करने की मांग जिला भाजपा अध्यक्ष सुनील मौदगिल के साथ भाजपा पार्षद गौरवजीत गोरा, पार्षद पति विशाल गुलाटी, पार्षद रोहित सिक्का ने महापौर के शिविर कार्यालय के सामने नारे लगाए और बाद में निविदा रद्द करने के लिए महापौर को एक ज्ञापन सौंपा। पार्षद गौरव भट्टी एफ एंड सीसी की बैठक स्थल तक पहुंचने के लिए जमालपुर में अपने कार्यालय से महापौर कार्यालय तक 12 किलोमीटर नंगे पैर चले। भट्टी ने आरोप लगाया कि पहले परियोजना का अनुमानित बजट 1,144 करोड़ रुपये तय किया गया था, लेकिन बिना किसी पारदर्शी आधार के इसे बढ़ाकर 1,408 करोड़ रुपये कर दिया गया।

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