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पराली प्रबंधन के लिए किसानों को ₹3,000 प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार : भूपिंदर

BKU Seeks ₹3,000 per Acre Aid for Stubble Management : मोगा। पंजाब में धान की कटाई और खरीद का सीजन तेज होने के बीच किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता की मांग उठाई है। भारतीय किसान यूनियन के मोगा जिला प्रधान भूपिंदर सिंह दौलतपुरा ने पंजाब सरकार से प्रति एकड़ 2,500 से 3,000 रुपये तक मुआवजा देने की मांग की है।

उन्होंने दावा किया कि अब तक करीब 8 से 10 प्रतिशत धान की कटाई हुई है और कई क्षेत्रों में पैदावार 60 से 65 मन प्रति एकड़ तक रह रही है। किसान नेता ने कहा कि मशीनरी की कमी, बढ़ते खर्च और गेहूं की समय पर बिजाई की मजबूरी के बीच किसानों को राहत देना जरूरी है। उन्होंने छोटे किसानों को सहकारी सभाओं के माध्यम से पराली प्रबंधन की मशीनरी उपलब्ध करवाने और जुर्माने के बजाय स्थायी समाधान निकालने की अपील की।

ऐसे में भारतीय किसान यूनियन ने पंजाब सरकार से पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 2500 से 3000 रुपये तक मुआवजा देने की मांग की है। यूनियन के मोगा जिला प्रधान भूपिंदर सिंह दौलतपुरा ने कहा कि किसान पराली जलाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन आर्थिक तंगी, मशीनरी की कमी और समय की सीमाओं के कारण उनके सामने कई तरह की समस्याएं आती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की मजबूरियों को समझते हुए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए।

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अब तक 8 से 10 प्रतिशत धान की कटाई, कम पैदावार का दावा गांव दौलतपुरा में खेतों का जायजा लेते हुए भूपिंदर सिंह ने बताया कि धान की विभिन्न किस्मों की कटाई का काम जारी है और अब तक करीब 8 से 10 प्रतिशत फसल की कटाई होने का अनुमान है। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर धान की पैदावार लगभग 60 से 65 मन प्रति एकड़ रह रही है, जिससे किसान निराश हैं। उन्होंने कहा कि बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण पंजाब के कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा है।

ऐसे में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए भी सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। पराली प्रबंधन के लिए आर्थिक सहायता जरूरी किसान नेता ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। किसान इस समस्या को समझते हैं और वे भी नहीं चाहते कि धुएं के कारण लोगों को सांस तथा आंखों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़े, लेकिन छोटे किसानों के लिए समय पर बेलर और अन्य कृषि मशीनरी का प्रबंध करना आसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि धान की कटाई के बाद पराली की गांठें बनाने और उन्हें खेतों से उठाने में समय लगता है। दूसरी ओर किसानों को गेहूं की बिजाई भी निर्धारित समय पर करनी होती है। यदि बिजाई में देरी होती है तो गेहूं की पैदावार प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए सरकार को किसानों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त सहायता देनी चाहिए। भूपिंदर सिंह ने मांग की कि सरकार प्रति एकड़ 2500 से 3000 रुपये मुआवजा दे या प्रति क्विंटल के हिसाब से आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए।

इसके अलावा सहकारी सभाओं के माध्यम से छोटे किसानों को पराली संभालने वाली मशीनरी मुफ्त या कम खर्च पर मुहैया करवाई जाए। केस दर्ज करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान निकाले सरकार भूपिंदर सिंह ने पराली जलाने के मामलों में किसानों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल केस दर्ज करने और जुर्माने लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष पंजाब में पराली जलाने के हजारों मामले सामने आए थे और इस वर्ष भी कार्रवाई की खबरें मिल रही हैं। कई बार किसानों को पुराने मामलों की जानकारी भी काफी समय बाद मिलती है।

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