मोगा: रक्त की एक बूंद किसी जरूरतमंद के लिए जिंदगी की उम्मीद बन सकती है। इसी सोच को अपने जीवन का उद्देश्य बनाकर सिटी ब्लड हेल्प मोगा पिछले 14 वर्षों से जरूरतमंद मरीजों के लिए निस्वार्थ सेवा कर रही है। वर्ष 2012 में चार लोगों से शुरू हुई यह पहल आज 10 हजार से अधिक रक्तदाताओं के परिवार में बदल चुकी है। मोगा ही नहीं, बल्कि पंजाब और देश के विभिन्न हिस्सों में संस्था का रक्तदाताओं से संपर्क बना हुआ है।
संस्था के चेयरमैन भारत भूषण ने बताया कि वर्ष 2012 में उनके साथी कवि भारती, विशाल रोड़ा, लवली नरूला और ऋषभ अग्रवाल ने मिलकर संस्था की शुरुआत की थी। वह वर्ष 2015 में इससे जुड़े। उन्होंने बताया कि पहली बार वह अपने मित्र के साथ डीएमसी अस्पताल गए थे, जहां उनके मित्र की माता को रक्त की जरूरत थी। वहां उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। रक्त मिलने के बाद मरीज के परिवार की आंखों में आए आंसू और उनके दिल से निकली दुआ ने भारत भूषण को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे संस्था के साथ नए सदस्य और रक्तदाता जुड़ते गए। आज मोगा जिले में 10 हजार से अधिक डोनर संस्था के संपर्क में हैं। इसके अलावा लुधियाना, दिल्ली, चंडीगढ़, होशियारपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट सहित पंजाब के अलग-अलग जिलों में भी रक्तदाताओं का नेटवर्क बनाया गया है।
भारत भूषण ने बताया कि संस्था को रक्तदाताओं की बदौलत तीन बार स्टेट, तीन बार नेशनल और दो बार इंटरनेशनल लाइफ सेवर अवार्ड मिल चुके हैं। इसके अलावा संस्था का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और ग्लोबल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दो बार दर्ज होने की जानकारी उन्होंने दी। पंजाब सरकार की ओर से भी संस्था को सम्मानित किया जा चुका है।
रोजाना 200 से 300 कॉल, फिर भी सेवा जारी
संस्था के सेवक कशिश धमीजा ने बताया कि वह करीब 15 वर्षों से इस सेवा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि कई बार रोजाना 200 से 300 फोन कॉल रक्त की जरूरत को लेकर आती हैं। फोन सुबह से लेकर देर रात तक आते रहते हैं। कई बार दूर-दराज के क्षेत्रों से रक्तदाता को लाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सेवा के दौरान कई बार आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। कोरोना काल में हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि परिवार के रोजमर्रा के खर्च के लिए भी परेशानी आई, लेकिन इसके बावजूद जरूरतमंदों की मदद का सिलसिला पूरी तरह बंद नहीं किया। बाद में सेवा को योजनाबद्ध तरीके से जारी रखा गया।
कशिश धमीजा के अनुसार 11 अगस्त को उन्होंने अपना 50वां रक्तदान पूरा किया। उनका कहना है कि जिंदगी में जितनी बार संभव हो सके, रक्तदान करते रहेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते रहेंगे।
संस्था से जुड़े सेवकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का आर्थिक लाभ लेना नहीं, बल्कि जरूरत के समय मरीज और उसके परिवार का सहारा बनना है। चार लोगों से शुरू हुई यह सेवा आज हजारों लोगों को जोड़ चुकी है और सेवकों की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी सम्मान से अधिक उस परिवार की दुआ है, जिसकी जिंदगी समय पर मिले रक्त से बच जाती है।
📍 Location: मोगा