Site icon Dainik Savera Times

SC सब-प्लान के तहत 17,700 करोड़ रुपये का बजट, दलजीत सिंह टोंग ने बताया अनुसूचित जातियों के विकास का रोडमैप

अमृतसर: पंजाब सरकार अनुसूचित जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। बाबा बकाला साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक दलवीर सिंह टोंग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार अनुसूचित जातियों के सशक्तिकरण और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

विधायक के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुसूचित जाति सब-प्लान (SC Sub Plan) के तहत 17,700 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह राशि राज्य के कुल विकास बजट का 35.23 प्रतिशत है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों से संबंधित परिवारों को शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

 शिक्षा और रोजगार पर रहेगा विशेष फोकस

विधायक दलवीर सिंह टोंग ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जातियों के युवाओं, महिलाओं और परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दे रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य जरूरतमंद परिवारों तक शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाना है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में समान भागीदारी निभा सकें।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने और परिवारों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने के अवसर मिल सकते हैं।

पिछले साल 97.6% बजट खर्च

विधायक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट खर्च का विवरण साझा करते हुए बताया कि SC सब-प्लान के तहत 13,987.16 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। इसमें से 97.6 प्रतिशत राशि खर्च की गई।

वहीं, मौजूदा वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक बजट अनुमान के मुकाबले 36.6 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है।

दलवीर सिंह टोंग ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के लिए बजट का समय पर उपयोग और वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सरकारी सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

 स्कॉलरशिप और आशीर्वाद योजना पर जोर

विधायक के मुताबिक, अनुसूचित जातियों के कल्याण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में बजट खर्च की स्थिति इस प्रकार रही है:

Post Matric Scholarship Scheme: बजट का 103.81 प्रतिशत खर्च।
Dairy Farming Scheme: बजट का 100 प्रतिशत खर्च।
Ashirwad Scheme: बजट का 93.58 प्रतिशत खर्च।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के जरिए विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने, जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता हासिल करने और लोगों को स्वरोजगार से जुड़ने में मदद देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों की पढ़ाई में सहायता करना है, जबकि आशीर्वाद योजना पात्र परिवारों को निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

योजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी

दलवीर सिंह टोंग ने कहा कि केवल बजट आवंटित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन, पात्र लाभार्थियों की पहचान और नियमित निगरानी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को समय-समय पर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर कोई कमी सामने आती है, तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी धन का अधिक प्रभावी उपयोग हो सके। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही को कल्याणकारी योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि सहायता का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

विधायक ने कहा कि अनुसूचित जातियों के युवाओं, महिलाओं और परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास के साथ रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने आवास, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार योजनाओं को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसे प्रयासों से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।

Exit mobile version