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पराली प्रबंधन में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

CAQM Cracks Down on Rising Stubble Burning : अमृतसर। अमृतसर और तरनतारन में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने चिंता जताई है। अध्यक्ष राजेश वर्मा के नेतृत्व वाली उच्चस्तरीय टीम ने दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर पराली प्रबंधन के उपायों की जानकारी ली। आयोग ने तरनतारन में विशेष निगरानी बढ़ाने, किसानों तक मशीनरी पहुंचाने और पराली का औद्योगिक ईंधन के रूप में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी भी दी गई।

इसका उद्देश्य धान की पराली के व्यापक प्रबंधन के लिए किए जा रहे उपायों का जायजा लेना और पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करने व पूरी तरह खत्म करने के लिए कदम उठाना था। टीम ने दोनों जिलों में पराली के ‘इन-सीटू’ (खेत में ही) और ‘एक्स-सीटू’ (खेत के बाहर) प्रबंधन, तथा इसके लिए उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की। आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए दोनों जिलों द्वारा की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।

टीम ने आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भविष्य में इन घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि थर्मल पावर प्लांट, ईंट-भट्ठों और ऐसे उद्योगों में, जहां ईंधन के रूप में पराली का उपयोग संभव है, वहां इसका अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अलग-अलग क्षेत्रों (सेक्टरों) के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं, जिनकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना हो कि संबंधित क्षेत्र या उद्योग वास्तव में पराली का उपयोग कर रहे हैं।

वे नियमित रूप से इसकी निगरानी करें तथा अनुपालन की रिपोर्ट दें। जमीनी स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करते हुए, आयोग ने अधिकारियों को गांवों और किसानों के पास नियमित रूप से जाने का निर्देश दिया। उन्हें न केवल पराली प्रबंधन सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में बताना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि आवश्यक मशीनरी और सुविधाएं किसानों तक समय पर पहुंचें। जिला प्रशासन से कहा गया है कि वे किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटरों (CHCs), मशीनरी प्रदाताओं और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करें।

तरनतारन जिले में अभी भी पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं सामने आ रही हैं, इसलिए तरनतारन के उपायुक्त को निर्देश दिया गया है कि वे इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और ऐसी घटनाओं को रोकने व उनके प्रबंधन के लिए जमीनी स्तर पर उपायों को तेज करें। आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि प्रभावी कदम उठाने में किसी भी तरह की लापरवाही या विफलता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी। इस दौरे के दौरान, CAQM के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा के नेतृत्व वाली उच्च-स्तरीय टीम ने अमृतसर में उन सुविधाओं का निरीक्षण किया, जहाँ धान के पराली (stubble) का इस्तेमाल ईंधन के स्रोत के रूप में किया जा रहा है।

टीम ने अमृतसर के एक औद्योगिक परिसर में स्थित बॉयलर का दौरा किया, जहाँ धान की पराली से बने छर्रों (pellets) का उपयोग ईंधन के तौर पर किया जा रहा है। इस दौरे से धान के अवशेषों के व्यावहारिक उपयोग का आकलन करने और ऐसे उपयोगी मॉडलों को बड़े पैमाने पर लागू करने की संभावनाओं को समझने का मौका मिला। आयोग ने फिर से जोर दिया कि धान की पराली के प्रबंधन को किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, अवशेष प्रबंधन और संसाधनों के उपयोग की एक व्यापक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।

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