Site icon Dainik Savera Times

पराली प्रबंधन के लिए बेलर मशीनों और कंट्रोल रूम की व्यवस्था, किसानों को मिलेगी मदद

CAQM Reviews Stubble-Burning Prevention Measures in Amritsar : अमृतसर। धान की कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उच्चस्तरीय टीम ने अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। आयोग के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस. डी. अत्री के नेतृत्व में टीम ने 9 और 10 अक्टूबर को हॉटस्पॉट गांवों में रोकथाम के उपायों का जायजा लिया। 10 अक्टूबर को अमृतसर में दोनों जिलों के उपायुक्तों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की गई। इसमें पराली प्रबंधन मशीनों की उपलब्धता, किसानों को सहायता, जागरूकता अभियान और पराली के वैकल्पिक उपयोग के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में संबंधित विभागों और जिला प्रशासन की तैयारियों तथा आपसी समन्वय की समीक्षा की गई, ताकि पराली का खेतों में ही प्रबंधन (इन-सीटू) और खेतों से बाहर उपयोग (एक्स-सीटू) प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। आयोग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें समय पर उपलब्ध करवाने, जागरूकता बढ़ाने, सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियां आयोजित करने तथा आवश्यक सहायता प्रदान करने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक के साथ-साथ CAQM की टीम ने 9 और 10 अक्टूबर 2026 को अमृतसर और तरनतारन जिलों के चयनित हॉटस्पॉट गांवों तथा संबंधित सुविधाओं का दौरा भी किया। इन दौरों का उद्देश्य जमीनी स्तर पर मौजूदा स्थिति का आकलन करना और पराली जलाने की रोकथाम के लिए लागू किए जा रहे उपायों की समीक्षा करना था। अमृतसर जिले में समीक्षा बैठक और फील्ड दौरे के दौरान धान की कटाई एवं खरीद की स्थिति के साथ-साथ फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनरी की उपलब्धता और तैनाती पर चर्चा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि अमृतसर और आसपास के जिलों की बेलर मशीनें पराली एकत्र करने और उसके प्रबंधन के लिए काम कर रही हैं। पराली की गांठों के उपयोग के लिए बॉयलर वाले उद्योगों के साथ एक आपूर्ति श्रृंखला स्थापित की गई है। इसके तहत किसानों और पराली एकत्र करने वाले एग्रीगेटर्स को इन उद्योगों से जोड़ा गया है, ताकि पराली का खेतों से बाहर प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

जिला प्रशासनिक परिसर में कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से CRM मशीनरी की आवश्यकता वाले किसानों की पहचान कर उन्हें मशीनें उपलब्ध करवाने में सहायता की जा रही है। आग लगने और पराली जलाने की घटनाओं की सूचना देने के लिए जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, ताकि तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

Exit mobile version