
Cases Registered Against Five Farmers : अमृतसर। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और कृषि विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। तरनतारन जिले के खादूर साहिब ब्लॉक के विभिन्न गांवों में पराली जलाने के आरोप में पांच किसानों के खिलाफ संबंधित पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए हैं।
डिप्टी कमिश्नर राहुल के निर्देशों और एसडीएम संजीव शर्मा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। बिहारीपुर, तख्तू चक, भरोवाल और चंबा खुर्द गांवों के किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। प्रशासन ने किसानों से पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अपील की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंचता है।
तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर राहुल के निर्देशों और खादूर साहिब के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट संजीव शर्मा के नेतृत्व में, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और साथ ही पराली के प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। तरनतारन के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह भंगू भी किसानों को फसल के अवशेषों का सही ढंग से प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, वैरोवाल पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बिहारीपुर गांव के अजयपाल (इंदर सिंह के पुत्र) और तख्तू चक गांव के लवजीत सिंह (इंदरजीत सिंह के पुत्र) के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इसी तरह, गोइंदवाल साहिब पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले भरोवाल गांव के सतविंदर सिंह (हरभजन सिंह के पुत्र) और सेवा सिंह (नजर सिंह के पुत्र), तथा चंबा खुर्द गांव के सुखजिंदर सिंह (दिलबाग सिंह के पुत्र) के खिलाफ भी पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पराली जलाने पर लगी रोक और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इसी तरह, एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने, फसल के अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
खादूर साहिब के क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह और डॉ. रूपिंदरजीत सिंह ने किसानों से अपील की कि वे फसल के अवशेषों को जलाने के बजाय खेतों में ही या अन्य उपलब्ध तरीकों से उनका प्रभावी ढंग से प्रबंधन करें। पराली जलाने से न केवल हवा प्रदूषित होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता, फायदेमंद सूक्ष्मजीवों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। अधिकारियों ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए पराली न जलाने की अपील की। साथ ही, उनसे कहा कि वे कृषि विभाग के साथ मिलकर उपलब्ध मशीनों और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करके फसल के अवशेषों का सही ढंग से प्रबंधन करें।