पंजाब डेस्क: सरकारी फंड की हेराफेरी से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आज पंजाब और चंडीगढ़ में बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ और लुधियाना सहित पांच अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत अपने कब्जे में लिए हैं। यह कार्रवाई चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और नगर निगम के बैंक खातों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है।
संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई
सीबीआई की टीमों ने उन स्थानों पर छापेमारी की, जहां जांच के दायरे में आए लोगों के रहने और कारोबार से जुड़े पते मौजूद हैं। जांच एजेंसी का फोकस उन व्यक्तियों और कंपनियों पर है, जिन पर कथित रूप से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से लाभ लेने का आरोप है। अधिकारियों ने सभी स्थानों पर कई घंटों तक रिकॉर्ड की जांच की।
जांच में मिले अहम डिजिटल सबूत
छापेमारी के दौरान सीबीआई ने स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। इसके अलावा बैंकिंग रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से संबंधित फाइलें भी जांच एजेंसी के कब्जे में आई हैं। इन सभी रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच के जरिए लेन-देन की पूरी श्रृंखला खंगाली जाएगी।
क्या है पूरा बैंक फ्रॉड मामला?
जांच के मुताबिक, यह मामला IDFC फर्स्ट बैंक की एक शाखा के माध्यम से सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये सरकारी खातों से दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि हरियाणा सरकार के कई विभागों के सरकारी फंड को कथित तौर पर फर्जी वित्तीय दस्तावेजों के जरिए डायवर्ट किया गया।
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सीबीआई क्यों कर रही है जांच?
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार के अनुरोध पर यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआई को सौंपी गई थी। अब एजेंसी वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि कथित घोटाले में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट की जा सके।

