लुधियाना: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए CBSE ने नई नीति लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। बोर्ड ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 की सिफारिशों को लागू करते हुए कक्षा छठी से ‘तीन भाषा फॉर्मूला’ अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।
छठी कक्षा से अनिवार्य होगा 3 भाषा फॉर्मूला
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब छात्रों को कक्षा 6 से तीन भाषाएं (R1, R2, R3) पढ़नी होंगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी दक्षता को बढ़ावा देना और उन्हें राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर बेहतर संवाद के लिए तैयार करना है।
स्कूलों को तुरंत शुरू करनी होगी तीसरी भाषा
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूल नई एनसीएफ आधारित पाठ्यपुस्तकों का इंतजार न करें। जब तक आधिकारिक किताबें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक स्कूल स्थानीय संसाधनों या सहायक पुस्तकों के माध्यम से तीसरी भाषा की पढ़ाई शुरू करें।
OASIS पोर्टल पर देनी होगी जानकारी
स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे जिस तीसरी भाषा को पढ़ा रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी बोर्ड के ‘OASIS’ पोर्टल पर अपडेट करें। इससे बोर्ड को क्रियान्वयन की निगरानी में आसानी होगी।
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9वीं-10वीं के विकल्पों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर भी पड़ेगा। छात्र कक्षा 9 और 10 में केवल उन्हीं भाषाओं का चयन कर सकेंगे, जिन्हें उन्होंने कक्षा 6 में तीसरी भाषा के रूप में पढ़ा होगा। यानी भाषा चयन अब शुरुआती कक्षाओं से ही तय हो जाएगा।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का मानना है कि इस कदम से छात्रों में भाषाई समझ, संवाद कौशल और सांस्कृतिक जागरूकता विकसित होगी। यह पहल नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अधिक सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

