माछीवाड़ा: पंजाब में मौसम की मार से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को लेकर स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई टीम ने आज समराला और माछीवाड़ा अनाज मंडियों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने मंडियों में रखे गेहूं के विभिन्न ढेरों से नमूने (सैंपल) एकत्र किए, जिन्हें आगे जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया गया है।
फसल नुकसान का आकलन शुरू
हाल ही में हुई ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण राज्य में गेहूं की फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। कई स्थानों पर दानों की चमक कम होने और आकार में कमी की शिकायतें सामने आई हैं। इसी कारण सरकारी खरीद एजेंसियों को फसल खरीद में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए खरीद मानकों में कुछ ढील देने की मांग भी उठाई गई है, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके और खरीद प्रक्रिया बाधित न हो।
जांच के लिए भेजे गए सैंपल
Food Corporation of India की टीम द्वारा लिए गए सैंपलों को चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मौसम की मार से गेहूं की गुणवत्ता पर कितना असर पड़ा है और किस स्तर तक इसे खरीदा जा सकता है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, जो गेहूं निर्धारित मानकों पर खरा उतर रहा है, उसकी खरीद जारी है, जबकि बाकी फसल के लिए केंद्र के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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किसानों और आढ़तियों की चिंता
मंडी प्रतिनिधियों और आढ़तियों ने चिंता जताई है कि अगर खरीद मानकों में जल्द राहत नहीं दी गई, तो मंडियों में गेहूं का भारी जमाव हो सकता है। इससे भंडारण की समस्या बढ़ेगी और किसानों तथा व्यापारियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उनका कहना है कि सैंपल जांच के बाद जल्द निर्णय लेकर मानकों में ढील की घोषणा की जानी चाहिए, ताकि खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रह सके और किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान मिल सके।
अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर यह तय होगा कि प्रभावित गेहूं की खरीद के लिए मानकों में कितनी राहत दी जाएगी और मंडियों में स्थिति को कैसे नियंत्रित किया जाएगा।

