पंजाब डेस्कः चंडीगढ़ की जिला अदालत ने नवजात बच्ची की मौत के बाद उसका शव झाड़ियों में फेंकने के मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने बच्ची के माता-पिता को दोषी करार देते हुए उन्हें जेल भेजने के बजाय मानवीय आधार पर प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया है।
क्या था मामला
यह घटना 9 सितंबर 2023 की है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने रुना देवी और उनके पति अरविंद मुखिया को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि दोनों ने अपनी नवजात बच्ची की मौत को छुपाने के इरादे से उसका शव सेक्टर-9 स्थित ‘हेयर मास्टर्स’ के पास झाड़ियों में फेंक दिया था। पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 94 और 3(5) के तहत अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत में जुर्म कबूल
सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने बिना किसी दबाव के, पूरी समझ और स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल किया है।
अदालत का मानवीय दृष्टिकोण
सजा पर विचार करते हुए अदालत ने दोषियों की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि दोनों के पांच छोटे बच्चे हैं और यदि माता-पिता को जेल भेजा जाता है, तो बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहेगा। साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी अत्यंत गरीब और बेसहारा पृष्ठभूमि से हैं।
प्रोबेशन पर रिहाई का आदेश
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोषियों को छह महीने की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रिहा करने का फैसला सुनाया।
शर्तों के साथ मिली राहत
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूर्ण रिहाई नहीं है। दोषियों को निम्न शर्तों का पालन करना होगा:-
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