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बठिंडा में बच्चों से जुड़े 68 मामलों पर कार्रवाई, 13 लापता बच्चे परिजनों से मिले

Child Welfare Committee Acts in 68 Cases in Three Months : बठिंडा। बाल विवाह, बाल श्रम, यौन शोषण और बच्चों की गुमशुदगी जैसी समस्याओं पर जिला प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। जुलाई से सितंबर 2026 तक बाल कल्याण समिति ने 68 मामलों में कार्रवाई करते हुए बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

इसी क्रम में उपायुक्त राजेश धीमान के निर्देशों का पालन करते हुए, सहायक आयुक्त (सामान्य) गुरजिंदर सिंह की अध्यक्षता में बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी एक त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान, बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास से संबंधित विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रवनीत कौर ने बताया कि बाल कल्याण समिति बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 से सितंबर 2026 के बीच, बाल कल्याण समिति ने बच्चों से जुड़े कुल 68 मामलों में कार्रवाई की।

इनमें बाल विवाह के 3 मामले, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े 27 मामले, लापता बच्चों के 14 मामले, बाल श्रम के 2 मामले और घर से चली गई लड़कियों से जुड़े 9 मामले शामिल थे। इसके अलावा, 4 बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया गया, 2 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने योग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई, और नवजात शिशुओं से जुड़े 2 मामलों का समाधान किया गया। इसी तरह, उन 5 मामलों में भी कार्रवाई की गई, जिनमें बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

लापता बच्चों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि 13 बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके माता-पिता से मिला दिया गया, जबकि एक बच्चे को सुरक्षा और देखभाल के लिए बाल गृह (चाइल्ड केयर होम) में रखा गया। साथ ही, अन्य राज्यों के बच्चों को उनके गृह स्थानों पर वापस भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए, और एक बच्चे को बाल गृह में स्थानांतरित किया गया। बैठक के दौरान, बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण और जरूरतमंद बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गई।

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