रूपनगर : त्योहारों के इस सीजन में रूपनगर शहर के बाजारों में रौनक भले ही दोगुनी हो, लेकिन प्रशासनिक नियमों का पालन कर रामलीला मैदान में दुकान लगाने वाले वैध पटाखा विक्रेता आज बर्बादी के कगार पर खड़े हैं। प्रशासन से बाकायदा लाइसेंस प्राप्त करने और विभागीय औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी इन विक्रेताओं के स्टॉल ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं। वजह स्पष्ट है-प्रशासनिक नाक के नीचे शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर चल रही अवैध पटाखों की बिक्री।
नियम मानने की मिली ‘सजा’, बिना लाइसेंस वाले काट रहे चांदी
पटाखा विक्रेताओं ने प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “रामलीला मैदान में आधिकारिक दुकान लगाने के लिए फायर सेफ्टी से लेकर नगर परिषद तक विभिन्न विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं। एनओसी और लाइसेंस प्रक्रिया में हजारों रुपये खर्च होते हैं, ऊपर से नगर परिषद उनसे अलग से फीस वसूलती है। लेकिन हमारी इस ईमानदारी का क्या सिला मिला? ग्राहक मैदान तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं।” पटाखा विक्रेताओं ने उजागर किया कि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर रामलीला मैदान को ही बिक्री केंद्र घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद शहर में अलग-अलग स्थानों पर पटाखों की बिक्री अवैध रुप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेला रोड से लेकर कल्याण सिनेमा के पास, मुख्य चौराहों, रैलों रोड समेत अन्य क्षेत्रों में में बिना किसी रोक-टोक और अनुमति के पटाखों के अवैध स्टॉल सजे हुए हैं।
लाइसेंसधारियों पर मंडराया आर्थिक संकट
एक लाइसेंसधारी पटाखा विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अवैध विक्रेताओं की मनमानी के कारण वैध दुकानदारों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अवैध बिक्री ही होनी थी, तो नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों पर सरकारी फीस और कागजी कार्रवाई का बोझ क्यों डाला गया?
व्यापारियों की दो टूक मांग
पीड़ित विक्रेताओं ने नगर प्रशासन और पुलिस विभाग से गुहार लगाई है कि नियम तोड़ने वाले अवैध पटाखा विक्रेताओं के खिलाफ तुरंत जब्ती व दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का पालन करने वाले व्यापारियों का हक न मारा जा सके।

