लुधियाना : बुड्ढा दरिया के प्रदूषण को खत्म करने और इसके कायाकल्प की दिशा में चल रहे कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित 41वीं बैठक में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने नगर निगम और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बैठकों में लिए गए फैसलों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
बैठक के दौरान सामने आया कि गुरुद्वारा गौ घाट साहिब के नजदीक दूषित पानी की निकासी के लिए लगाए गए पंप करीब 20 दिनों से ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस पर सांसद सीचेवाल ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि पंपों की खराबी की जानकारी उन्हें समय रहते क्यों नहीं दी गई। उन्होंने इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।
तालाब की सफाई में देरी पर भी जताई नाराजगी
ताजपुर डेयरी परिसर के समीप सीचेवाल मॉडल के तहत तैयार किए गए अस्थायी तालाब के रखरखाव में भी खामियां सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि लगभग तीन सप्ताह से तालाब से जमा गाद हटाने का काम नहीं हुआ है। इसके पीछे गोबर के निपटान के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
इस पर संत सीचेवाल ने अधिकारियों से कहा कि बुद्धा दरिया को प्रदूषण से बचाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है, ऐसे में किसी समस्या की जानकारी समय पर देना जरूरी है। उन्होंने मौके पर ही गोबर के निपटान का विकल्प बताते हुए कहा कि गांव भुकरी खुर्द में करीब साढ़े पांच एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल इसके उचित निस्तारण के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में गोबर या अन्य प्रदूषक पदार्थ बुद्धा दरिया में नहीं पहुंचने चाहिए। सीचेवाल ने कहा कि लगातार किए जा रहे प्रयासों से दरिया के पानी की गुणवत्ता में सुधार आया है और इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लुधियाना के नागरिकों से दरिया को अपनी प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर मानकर इसके संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
21 अवैध डेयरियों पर कार्रवाई के निर्देश
बैठक में क्षेत्र में संचालित 21 अवैध डेयरियों को लेकर भी चर्चा हुई। संत सीचेवाल ने संबंधित अधिकारियों को इन डेयरियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डेयरियों से निकलने वाले गोबर और मूत्र को दरिया या इसके आसपास के जल स्रोतों में जाने से रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक में कुल 26 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों पर विभागों की ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
केवल बैठकें नहीं, परिणाम भी चाहिए
संत सीचेवाल ने लंबित मामलों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बुद्धा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन जब तक अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों को समयसीमा के भीतर लागू नहीं किया जाता, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और अधूरे कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद यदि उन पर अमल नहीं होता तो समीक्षा बैठकों का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है।
बैठक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन, औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट जल के नमूनों की जांच, ईटीपी आउटलेट्स की निगरानी, अवैध डेयरियों पर नियंत्रण, डेयरियों से निकलने वाले गोबर व मूत्र को दरिया में जाने से रोकने तथा बुद्धा दरिया के किनारों पर पौधारोपण सहित कई मुद्दों पर भी विस्तार से विचार किया गया।
संत सीचेवाल ने अधिकारियों से कहा कि पिछले निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट पूरी तरह तैयार की जाए और जो कार्य अभी तक लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने दोहराया कि बुद्धा दरिया को प्रदूषण मुक्त करना किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन, संबंधित संस्थाओं और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। इस अभियान में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

