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CM भगवंत सिंह मान ने वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कामगारों की सेवाओं को नियमित किया, नियुक्ति पत्र सौंपे

CM Mann regularized services of 516 daily-wage workers of Forest Department

CM Mann regularized services of 516 daily-wage workers of Forest Department

चंडीगढ़: ठेका आधारित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भगवंत सिंह मान सरकार ने आज वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कामगारों की सेवाओं को नियमित किया है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे और वन विभाग के 237 अधिकारियों व कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने की भी घोषणा की।

कर्मचारियों की भलाई और पारदर्शी शासन के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा ठेकेदारी प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, पूर्ण रूप से मेरिट के आधार पर 68,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं और रंगला पंजाब बनाने के सरकार के लक्ष्य के तहत हर योग्य कर्मचारी को सम्मान, नौकरी की सुरक्षा और बराबर के अवसर मिलते रहेंगे। इस समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स हैंडल पर लिखा: “आज का दिन वन विभाग के कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण और खुशी भरा रहा। सालों से इंतजार कर रहे 516 दिहाड़ीदार कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करते हुए हमने उन्हें नियमित नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। इसके साथ ही विभाग के 237 कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने पर भी मुहर लगाई गई है।”

उन्होंने आगे लिखा, “हमारी सरकार ने ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त कर दी है और अब तक 68,000 से अधिक युवाओं को नियमित सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। हम रंगला पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” एकत्रीकरण को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैंने कभी भी ऐसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए जिससे किसी कर्मचारी का नुकसान हुआ हो या राज्य या इसके कर्मचारियों को कोई वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा हो। पिछली सरकारों ने कभी भी ठेका आधारित कर्मचारियों का साथ नहीं दिया क्योंकि उन्होंने इन कर्मचारियों द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को कभी समझा ही नहीं। मुझे पूरा भरोसा है कि वन विभाग के कर्मचारी पंजाब के हरे-भरे क्षेत्र को बढ़ाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान लगातार देते रहेंगे। इसके साथ ही हमारी सरकार पूरे राज्य में वन फॉरेस्ट रेस्ट हाउसों के कायाकल्प के लिए भी सार्थक प्रयास कर रही है।”

कर्मचारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकारों के दौरान ऐसे समारोह कभी हुए ही नहीं क्योंकि उस समय सत्ता में बैठे लोग कर्मचारियों के प्रति हमेशा उदासीन रवैये वाले रहे। पर आप सरकार के सत्ता में आने के बाद माहौल बदल गया है। आज लोग ऐसे खुशी के मौकों के गवाह और हिस्सा बन रहे हैं। यह रंगले पंजाब की झलक है और हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही कि लोग ऐसी पहलकदमियों के माध्यम से खुशी और सम्मान का अनुभव करते रहें।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 65,000 से अधिक ठेका आधारित कामगारों ने राज्य की सेवा में अपनी जिंदगी के कई कीमती साल दिए हैं। आज पंजाब सरकार उन्हें वह दे रही है, जो उनका हक है। अब इन कर्मचारियों और सरकार के बीच कोई ठेकेदार नहीं होगा। अब से इन कर्मचारियों को सीधा रोजगार होगा, जो सम्मानजनक होने के साथ-साथ उन्हें पक्का होने का स्पष्ट रास्ता देगा।”

सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि हमारी सरकार ने पंजाब के युवाओं को लगभग 68,268 सरकारी नौकरियां दी हैं। पैसे लेने और पक्षपात का दौर खत्म हो गया है। आज योग्य युवाओं को केवल मेरिट और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। यही कारण है कि हमारी सरकार द्वारा की गई एक भी नियुक्ति को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी गई।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “यह नीति कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा की गारंटी देती है क्योंकि हमारी सरकार हर कर्मचारी के हितों और भलाई की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 16 मई, 2023 को अधिसूचित ऐतिहासिक नीति के तहत इस नीति के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारियों को नौकरी की पूरी सुरक्षा प्रदान की गई है। वे 58 वर्ष की आयु तक बिना किसी बाधा के अपनी नौकरी करते रहेंगे, जिसके बाद वे सामान्य प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्त होंगे।”

नीति के प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जनवरी 2024 में वित्त विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी और स्पष्ट वेतन संरचना निर्धारित की गई है। इस नीति में ग्रुप डी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा और ग्रुप सी ड्राइवरों के लिए दसवीं कक्षा निर्धारित की गई है। जो 516 कर्मचारी शैक्षणिक योग्यता के मानदंड पूरे नहीं करते, सरकार द्वारा उन्हें भी बड़ी राहत दी गई है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी योग्य कामगार इस नीति के लाभों से वंचित न रहे।”

पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के लोगों ने उन शासकों को भुला दिया है जिन्होंने उन्हें तवज्जो नहीं दी थी। आज मैं राहत महसूस कर रहा हूं क्योंकि हमारी सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। वन विभाग के दिहाड़ीदार कामगारों के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है, जिन्होंने कई सालों तक विभाग के लिए अपनी सेवाएं दी हैं और अब वे नियमित कर्मचारियों के रूप में औपचारिक रूप से सरकारी परिवार का हिस्सा बन रहे हैं। मैं उन सभी को दिल से बधाई देता हूं क्योंकि एक सरकारी नौकरी न सिर्फ एक कर्मचारी को बल्कि पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करती है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज नियमित किए जा रहे 516 दिहाड़ीदार कामगारों में से कई ने 10 साल से अधिक सेवा निभाई है, जबकि कई ने लगभग 25 साल तक दिहाड़ीदार के रूप में काम किया है। एक दशक से अधिक समय तक विभाग के लिए सेवा करने के बावजूद, कई कामगार निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं और आयु के मानदंडों के कारण 2023 की नीति के तहत योग्य नहीं हो सके थे। इसलिए मंत्रिमंडल ने इन शर्तों में विशेष छूट को मंजूरी दी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य कामगार नियमित होने के लाभों से वंचित न रहे।” वन विभाग के कर्मचारियों के योगदान की सराहना करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “वन विभाग के दिहाड़ीदार कामगारों ने पंजाब को हरा-भरा रखने और इसके जंगलों व वन्य जीवों की रक्षा के लिए अमूल्य योगदान दिया है। पिछले चार वर्षों के दौरान वन विभाग में 1,458 दिहाड़ीदार कामगारों को नियमित किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 342 अन्य कर्मचारियों को नियमित नियुक्तियों के माध्यम से भर्ती किया गया है।”

इस दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए सुरिंदर कौर, जसपाल सिंह, सुरिंदर सिंह, जसबीर कौर, गुरप्रीत सिंह, हालम सिंह, रविकांत और अन्यों ने बताया कि वे कई सालों से विभाग में सेवा निभा रहे हैं लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने उनकी भलाई के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों से किए हर वादे को पूरा किया है, जबकि पिछली सरकारें उन्हें लगातार नजरअंदाज करती रही। इस फैसले पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सेवाओं के नियमित होने से उनमें और उनके परिवारों में खुशी की लहर है और वे अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री के हमेशा ऋणी रहेंगे। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक, वन विभाग के सचिव के.के. यादव और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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