एडवोकेट धामी ने कहा कि गुरुद्वारे में जहाँ ‘गुरु का लंगर’ (सामुदायिक रसोई सेवा) परोसा जाता है, उस जगह को निशाना बनाना बहुत गंभीर मामला है और ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस हरकत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे सिख संगत (समुदाय) के लिए केवल धार्मिक स्थल ही नहीं हैं, बल्कि सेवा, एकता और आस्था के केंद्र भी हैं। ‘गुरु का लंगर’ की परंपरा बिना किसी भेदभाव के पूरी मानवता को सेवा और समानता का संदेश देती है।
इसलिए, लंगर हॉल या गुरुद्वारा परिसर के भीतर किसी भी इमारत को नुकसान पहुँचाने वाली कोई भी हरकत एक गंभीर मामला है जो संगत की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे की पवित्रता, ‘गुरु का लंगर’ की सेवा और संगत की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और उनके प्रति किसी भी तरह का अनादर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि संबंधित शिरोमणि कमेटी सदस्य और गुरुद्वारा प्रबंधक को निर्देश जारी किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी आग्रह किया।

