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पराली जलाने की घटनाओं पर डीसी सागर सेतिया ने खुद संभाला मोर्चा, 11 गांवों के खेतों में पहुंचकर लिया जायजा

मोगा: धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन मोगा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने खुद मैदान में उतरकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने शुक्रवार को जिले के 11 गांवों के खेतों में पहुंचकर पराली जलाने की घटनाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने मोगा, तलवंडी भंगेरियां, रौली, कपूरें, दाता, भिंडर कलां, कोकरी बहनीवाल, कोकरी बुट्टरां, तलवंडी मल्लियां, कोकरी कलां और अजीतवाल सहित 11 गांवों के खेतों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खेतों में पहुंचकर जमीनी स्तर पर स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर तैनात नोडल अधिकारियों, क्लस्टर अधिकारियों और फायर ब्रिगेड की टीमों के साथ तालमेल बनाकर आग बुझाने की कार्रवाई का जायजा लिया तथा जरूरी निर्देश दिए।

डीसी ने अधिकारियों को हिदायत दी कि खेतों में आग लगने की कोई भी सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारी बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचें। केवल आग लगने की घटना को दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि आग को तुरंत बुझाया जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है और इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह समस्या केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी।

डिप्टी कमिश्नर ने गांव स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि नोडल अधिकारी और क्लस्टर अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें। वे किसानों के साथ सीधा संपर्क बनाकर उन्हें पराली के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक करें और कृषि विभाग की ओर से सुझाए गए वैज्ञानिक तरीकों के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि खेतों में जाकर स्थिति पर नजर रखना भी जरूरी है।

इस दौरान डीसी ने किसानों से अपील की कि वे पराली को आग लगाने की बजाय उपलब्ध कृषि मशीनरी और आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल करें। पराली का उचित प्रबंधन करने से जहां मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है, वहीं वातावरण की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। इससे लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने में मदद मिलती है।

इस मौके पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) जसपिंदर सिंह, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास) कुलप्रीत सिंह और विशेष कार्य अधिकारी (शहरी विकास) हरशिता शर्मा भी मौजूद रहे, जिला प्रशासन ने दोहराया कि पराली प्रबंधन को लेकर सरकार के निर्देशों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा। खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर रोक लगाने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रशासन की टीमें लगातार सक्रिय रहेंगी।

📍 Location: मोगा

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