
DC Urges Farmers to Avoid Stubble Burning : अमृतसर। धान की पराली जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को नुकसान से बचाने के लिए डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने किसानों से पराली का उचित प्रबंधन करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि एक टन पराली जलाने से मिट्टी के कई जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति प्रभावित होती है। पराली के धुएं से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने किसानों को पराली खेतों में मिलाने, बेलर मशीन से गांठें बनाकर बेचने और इसे पशुओं के सूखे चारे के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी।
पराली जलाने से निकलने वाले जहरीले धुएं का बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय खेतों में ही मिलाने को प्राथमिकता दें। उन्होंने बताया कि एक टन पराली जलाने से लगभग 400 किलोग्राम जैविक कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है। इसलिए भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने और पर्यावरण की रक्षा के लिए पराली का उचित प्रबंधन बेहद आवश्यक है।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि किसान बेलर मशीन की सहायता से पराली की गांठें बनाकर उन्हें बेच सकते हैं और अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली को अनावश्यक बोझ समझने के बजाय इसे आय के एक संभावित स्रोत के रूप में देखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पराली का उपयोग पशुओं के सूखे चारे के रूप में भी किया जा सकता है। उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने से परहेज करें तथा इसका उचित प्रबंधन करके पर्यावरण की शुद्धता, मिट्टी की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।