चंडीगढ़: पंजाब विजिलेंस से जुड़े रिश्वतखोरी मामले में नामजद डीजीपी (विजिलेंस) के रीडर ओपी राणा ने देर रात सीबीआई अदालत में सरेंडर कर दिया। इसके बाद अदालत ने उन्हें 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी अब इस मामले से जुड़े अहम तथ्यों और कथित साजिश की कड़ियों को खंगालने में जुटी है।
रिश्वतखोरी के 13 लाख रुपये के मामले में जांच
यह मामला करीब 13 लाख रुपये की रिश्वत से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसमें सीबीआई ने पहले ही तीन अन्य आरोपियों राघव गोयल, विकास उर्फ विक्की गोयल और अंकित वधवा को गिरफ्तार किया था।
सीबीआई के अनुसार, यह मामला एक शिकायतकर्ता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पंजाब विजिलेंस विभाग में लंबित आय से अधिक संपत्ति (DA) केस को निपटाने के बदले रिश्वत की मांग की गई।
CBI के आरोप
सीबीआई का दावा है कि आरोपियों ने एक मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाते हुए शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारियों के बीच मुलाकात कराई। इस दौरान कथित तौर पर यह प्रस्ताव रखा गया कि मामला “सुलझाने” के बदले 20 लाख रुपये और एक महंगा मोबाइल फोन मांगा गया।
एजेंसी के अनुसार, जाल बिछाकर की गई कार्रवाई में दो आरोपियों को 13 लाख रुपये नकद और अन्य सामान के साथ गिरफ्तार किया गया, जबकि ओपी राणा मौके से फरार हो गए थे।
ये भी पढ़ें…
जांच आगे बढ़ी
सीबीआई अब रिमांड अवधि के दौरान ओपी राणा से पूछताछ करेगी ताकि इस कथित रिश्वत नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा सके। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ में इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

