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आनंदपुर साहिब मामले की CBI जांच की मांग, तीन दिन का अल्टीमेटम

Dhami Raises Rajoana, SGPC Poll Issues : अमृतसर। SGPC की अंतरिम कमेटी की बैठक में श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की गई। SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि पंजाब सरकार तीन दिन में जांच CBI को नहीं सौंपती है तो राज्यपाल के समक्ष यह मांग रखी जाएगी। बैठक में बलवंत सिंह राजोआना और SGPC चुनावों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

SGPC Seeks CBI Probe in Anandpur Sahib Case
मीटिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए SGPC प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े मामले में एक महिला के लगाए आरोपों के मामले में केस दर्ज होने के बाद इसकी जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से करवाई जानी चाहिए और जांच के विषयों को सोशल मीडिया ट्रायल का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। कुछ पार्टियां SGPC की जांच टीम पर एतराज जता रही हैं, जबकि पंजाब सरकार पुलिस के जरिए जो जांच कर रही है, उस पर लोगों को भरोसा नहीं है। इसलिए अंतरिम कमेटी मांग करती है कि पंजाब सरकार इस मामले की जांच CBI को सौंपे।

उन्होंने कहा कि SGPC की जांच टीम एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से अपनी जांच जारी रखेगी, जबकि CBI को इस पूरे मामले के हर पहलू को पढ़कर निष्पक्ष फैसला देना चाहिए। अगर पंजाब सरकार तीन दिन के अंदर जांच CBI को नहीं सौंपती है, तो आने वाले दिनों में इस संबंध में पंजाब के गवर्नर से मांग की जाएगी। पिछले समय से उनकी चुप्पी की चर्चा पर जब दर्ज किया गया मामला जांच का विषय है, तो जांच से जुड़े फैक्ट्स को पब्लिक करना सही नहीं है।

एडवोकेट धामी ने दूसरे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि कल श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज की लीडरशिप में शिरोमणि कमेटी का एक डेलीगेशन भाई बलवंत सिंह राजोआना से मिला था, जिसमें भाई राजोआना ने अपने खिलाफ शिरोमणि कमेटी की तरफ से दायर की गई पिटीशन को गुरमत के हिसाब से वापस लेने के बारे में भावना जाहिर की थी, उस पर आज की मीटिंग में गंभीरता से चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि इंटरिम कमेटी भाई राजोआना की तरफ से गुरमत की रोशनी में दी गई दलीलों से पूरी तरह सहमत है। हालांकि, यह अपील श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश के मुताबिक दायर की गई थी। इसलिए इंटरिम कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील करती है कि वे गुरमत की फिलॉसफी और सिख इतिहास की रोशनी में ऑर्डर भेजें। इस मौके पर उन्होंने सरकार से भाई जगतार सिंह हवारा को उनकी बीमार मां से मिलने के लिए तुरंत पैरोल देने की भी मांग की और 2 अक्टूबर को नेशनल जस्टिस फ्रंट द्वारा निकाले जा रहे खालसा मार्च को पूरा सपोर्ट देने का भी ऐलान किया।

एडवोकेट धामी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों को लेकर कुछ लोगों द्वारा पंजाब एक्ट बनाने की मांग पर भी कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक सौ साल पुरानी संस्था है, जो बड़ी कुर्बानियों के बाद बनी है और यह दुख की बात है कि आज सिख विरोधी ताकतों के एजेंडे के तहत कुछ लोग इसके संवैधानिक अस्तित्व और अहमियत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो लोग पंजाब एक्ट की वकालत कर रहे हैं। उन्हें भविष्य में होने वाले देश के नुकसान को समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में देरी का मामला सरकार से जुड़ा है और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी कई बार इन चुनावों को समय पर कराने की मांग की है और अब भी कर रही है। SGPC प्रेसिडेंट ने पंजाब के मुद्दों, समस्याओं और चुनौतियों का सामना करने और श्री अकाल तख्त साहिब से पंथिक चेतना के लिए मीरी पीरी खालसा मार्च में पूरी भागीदारी और सहयोग के लिए सिख संस्थाओं, संगठनों और संगत का भी धन्यवाद किया। उन्होंने मीरी पीरी खालसा मार्च में SGPC के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दी गई सेवाओं की भी तारीफ की।

उन्होंने कहा कि खालसा मार्च के दौरान जहां युवाओं से सीधी बातचीत हुई। वहीं पंजाब के सामने आने वाली कई बड़ी चुनौतियों की भी पहचान हुई। कई गांव-गांव में लोगों से मिलने के दौरान जानलेवा ड्रग्स के कारण पंजाब के युवाओं की बर्बादी का सच सामने आया। उन्होंने कहा कि चिट्टा जैसा जानलेवा ड्रग्स आम तौर पर मिल रहा है, जिससे पंजाब का युवा बर्बाद हो रहा है। खालसा मार्च के दौरान कई युवाओं ने साफ-सुथरा रहने और ड्रग्स छोड़ने की कसम खाई, जो एक अच्छी शुरुआत है। मीटिंग में सेक्शन 85, सेक्शन 87, ट्रस्ट, एजुकेशन से जुड़े अलग-अलग डिपार्टमेंट के काम को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष स. रघुजीत सिंह विर्क, कनिष्ठ उपाध्यक्ष स. बलदेव सिंह कल्याण, महासचिव स. शेर सिंह मंडवाला, मुख्य सचिव स. कुलवंत सिंह मनन, अंतरिम सदस्य स. सुरजीत सिंह गढ़ी, स. सुरजीत सिंह तुगलवाल, स. सुरजीत सिंह कंग, स. गुरप्रीत सिंह झब्बर, स. दलजीत सिंह भिंडर, बीबी हरजिंदर कौर, स. बलदेव सिंह कायमपुर, स. मेजर सिंह ढिल्लों, स. मंगविंदर सिंह खापरखेड़ी, ओएसडी स. सतबीर सिंह, सचिव स. बलविंदर सिंह काहलवां, इंजी. सुखमिंदर सिंह, अतिरिक्त सचिव स. जसविंदर सिंह जस्सी, स. प्रीतपाल सिंह, उप सचिव स. गुरदयाल सिंह, स. गुरनाम सिंह, स. हरभजन सिंह वक्ता, स. आजाद दीप सिंह, प्रबंधक स. मेजर सिंह, पूर्व. स. जतिंदरपाल सिंह, इंचार्ज स. परजिंदर सिंह, स. गुरप्रीत सिंह, स. कारज सिंह, स. गुरपताप सिंह, स. तरसेम सिंह आदि मौजूद थे।

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