
Digital Overuse May Affect Youth Mental Health : लुधियाना। डिजिटल दुनिया में बढ़ता समय और वास्तविक सामाजिक रिश्तों से दूरी युवाओं में अकेलेपन व मानसिक तनाव की वजह बन सकती है। डॉ. महाजन ने कहा कि लंबे समय तक भावनात्मक सहारे की कमी रहने से कुछ युवाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं उभर सकती हैं।
इसका असर उनके व्यवहार, धैर्य और दूसरों के विचारों को समझने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने डिजिटल गतिविधियों और वास्तविक सामाजिक मेलजोल के बीच संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही, लगातार उदासी, बेचैनी, नींद में बदलाव या रोज़मर्रा के कामों में रुचि कम होने जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने की अपील की। लंबे समय तक अकेले रहने और भावनात्मक सहारे की कमी से मानसिक तनाव बढ़ सकता है, जिससे कुछ लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर युवाओं के स्वभाव और रोज़मर्रा के व्यवहार पर भी पड़ सकता है; सहनशीलता और धैर्य की कमी के कारण वे छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो सकते हैं और दूसरों के नज़रिए को समझने में उन्हें मुश्किल हो सकती है।
इसलिए, डिजिटल दुनिया और असल ज़िंदगी के सामाजिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है। डॉ. महाजन ने सलाह दी कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर किसी को लगातार उदासी, बेचैनी, ध्यान न लगा पाना, नींद के पैटर्न में बदलाव या रोज़मर्रा के कामों में दिलचस्पी कम होने जैसी समस्याएं महसूस हों, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही ज़रूरी है। समय पर मदद लेने, परिवार से बात करने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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