चंडीगढ़: पंजाब में धान की खेती में इस साल एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने खरीफ सीजन 2025 के लिए ‘सीधी बिजाई विधि’ (Direct Seeding of Rice – DSR) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का ऐलान किया है। सरकार का लक्ष्य है कि इस बार प्रदेश की 5 लाख एकड़ ज़मीन पर धान की बुआई DSR तकनीक से की जाए।
DSR तकनीक पंजाब के कृषि परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। अगर यह अभियान सफल रहा, तो यह राज्य के कृषि मॉडल को टिकाऊ, लाभदायक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਧਰਤੀ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਭਰ ‘ਚ ਅੱਜ ਤੋਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਹੋਣ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਰਾਹੀਂ ਇਸ ਵਾਰ ਅਸੀਂ 5 ਲੱਖ ਏਕੜ ਰਕਬੇ ਦਾ ਟੀਚਾ ਮਿੱਥਿਆ ਹੈ। ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਜਿੱਥੇ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਰਾਹੀਂ 15-20% ਪਾਣੀ ਦੀ ਬੱਚਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਹੀ ਹੋਰ ਖ਼ਰਚਾ ਵੀ ਬੱਚਦਾ ਹੈ। ਐਤਕੀਂ ਬਾਸਮਤੀ ਦੀਆਂ…
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) May 15, 2025
-आर्थिक मदद से किसानों को संबल
सरकार की ओर से किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए ₹1,500 प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इतना ही नहीं, बासमती धान की खेती करने वाले किसान भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
-पिछले साल की तुलना में बड़ी छलांग
2024 में DSR तकनीक को अपनाने में किसानों ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। 2.53 लाख एकड़ भूमि में DSR तकनीक से बुआई हुई, जो 2023 की तुलना में 47% अधिक है। इस दौरान 21,338 किसानों को ₹29.02 करोड़ की राशि सहायता स्वरूप प्रदान की गई।
-DSR तकनीक के फायदे: पानी और पैसे की बचत
राज्य सरकार और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, DSR से खेती करने पर किसानों को 15-20% तक पानी की बचत होती है, जो जल संकट झेल रहे पंजाब के लिए राहत भरी खबर है। इसके अलावा, पारंपरिक विधि की तुलना में प्रति एकड़ ₹3,500 तक की मज़दूरी लागत में भी कमी आती है।

