मानसा : गांव भम्मे कलां के नौजवान दलजीत सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में मतभेद गहरा गए हैं। वहीं 19वें दिन भी परविंदर झोटा का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। एक ओर दलजीत के पिता जरनैल सिंह परिवार को धरने से वापस बुलाकर बेटे का धार्मिक रस्मों के साथ अंतिम संस्कार करने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पत्नी परमजीत कौर, मां शिंदरपाल कौर और बहन अमरजीत कौर अंतिम संस्कार के लिए सहमत नहीं हैं।
धरने पर बैठी परमजीत कौर ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन उनके पिता पर अंतिम संस्कार के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक दलजीत का शव मानसा लाने के दौरान प्रदर्शन दौरान हिरासत में लिए गए युवकों को रिहा नहीं किया जाता और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक दलजीत का अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जबरन संस्कार करवाने का प्रयास किया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
उनका आरोप है कि परिवार को पैसे, नौकरी और अन्य प्रलोभन देने के साथ डराया-धमकाया भी जा रहा है। वहीं, पिता जरनैल सिंह का कहना है कि वह लगातार परिवार को अंतिम संस्कार के लिए बुला रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही। उनका मानना है कि बेटे का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कर देना चाहिए।
इस दौरान धरने को पूर्व विधायक सुखविंद्र औलख, नवजोत कौर लंबी, भजन सिंह घुम्मण, सुरेश नंदगढ़िया, गगन सिरसीवाला, अमन पटवारी, मनीष बब्बी दानेवालिया, राजविंद्र राणा, कृष्ण चौहान, धन्ना मल गोयल, प्रेम अरोड़ा, हरदीप सिद्धू, चमकौर सिंह, बोघ सिंह, निर्मल सिंह झंडूके, जसवीर कौर नत, डॉ. जनकराज सिंगला, कर्मजीत मानूके, अरविंद्र कौर, हरप्रीत समराला, जगदेव भुपाल, हरजिंद्र मानशाहिया, बाबा तारा सिंह और नरिंद्र कौर बुर्ज हमीरा ने भी संबोधित किया।

