फरीदकोट: पंजाब सरकार की ओर से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस बढ़ाने के फैसले का इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने सरकार से बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लेने और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बजट में पर्याप्त बढ़ोतरी करने की मांग की है।
IDPD के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण मित्रा और केंद्रीय समिति सदस्य डॉ. इंद्रवीर गिल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को मुनाफा कमाने का जरिया बनाने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस में लगातार बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर किसान, मजदूर, निम्न आय और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
डॉक्टरों ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए मेडिकल शिक्षा पहले ही काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में फीस बढ़ने से उनके डॉक्टर बनने के सपने के सामने आर्थिक बाधाएं और बढ़ जाएंगी। संगठन के मुताबिक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरतों के मुताबिक योग्य डॉक्टर तैयार करना होना चाहिए, न कि शिक्षा के जरिए राजस्व जुटाना।
IDPD ने कहा कि सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी का बोझ विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर डालना चिकित्सा शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण का संकेत है। संगठन ने दावा किया कि पंजाब में सरकारी स्तर पर MBBS की पढ़ाई देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में महंगी पड़ रही है। इस संबंध में पश्चिम बंगाल, दिल्ली और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए फीस ढांचे की दोबारा समीक्षा करने की मांग की गई है।
डॉ. अरुण मित्रा और डॉ. इंद्रवीर गिल ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार और सुलभ चिकित्सा शिक्षा एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। यदि योग्य विद्यार्थियों के लिए मेडिकल शिक्षा लगातार महंगी होती गई, तो भविष्य में समाज को पर्याप्त संख्या में डॉक्टर उपलब्ध कराने में भी चुनौती आ सकती है।
IDPD ने पंजाब सरकार से बढ़ी हुई MBBS फीस वापस लेने, सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त वित्तीय सहायता देने और आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना हर योग्य विद्यार्थी के लिए चिकित्सा शिक्षा को सुलभ बनाने की अपील की है।
📍 Location: Faridkot (Faridkot)

