मोगा। मोगा में प्रताप रोड के सुंदरीकरण के नाम पर तैयार किए गए करोड़ों रुपये के एस्टीमेट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष डॉ. हरजोत कमल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए साफ शब्दों में कहा है कि विकास के नाम पर मोगा की जनता के साथ खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रताप रोड के सुंदरीकरण के लिए तैयार किए गए एस्टीमेट में दर्शाई गई लागत और प्रस्तावित कार्यों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।
डॉ. हरजोत कमल का आरोप है कि प्रताप रोड पर विकास कार्यों के नाम पर जिस तरह की योजना तैयार की गई है, उसने पहले ही त्योहारों के सीजन में व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि त्योहारों का सीजन व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, लेकिन नगर निगम की कथित लापरवाही और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के कारण दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों की कुछ टीमों द्वारा मौके पर चल रहे कार्यों की वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने और सैंपल लिए जाने की जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार, एस्टीमेट में दर्ज कुछ मदों और उनकी लागत को देखकर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इन निरीक्षणों और सैंपल की कार्रवाई के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
₹1.72 करोड़ का एस्टीमेट, लेकिन काम का पूरा हिसाब कहां?
डॉ. हरजोत कमल ने प्रताप रोड की ब्यूटीफिकेशन परियोजना के लिए तैयार किए गए ₹1 करोड़ 72 लाख 84 हजार रुपये के एस्टीमेट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके टैक्स का पैसा किन कार्यों पर और किस दर से खर्च किया जा रहा है। उन्होंने एस्टीमेट का हवाला देते हुए दावा किया कि सड़क पर 30 पोल लगाए जाने हैं, जिन पर दो-दो फैंसी लाइटें लगाने का प्रावधान है। उन्होंने इन पोल और लाइटों की लागत को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि क्या मौजूदा सड़क की वास्तविक परिस्थितियों में इन सुविधाओं से सुंदरीकरण का अपेक्षित लाभ मिल पाएगा?
उन्होंने बेंचों और पौधों पर प्रस्तावित खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, एस्टीमेट में 30 बेंचों की लागत 1,67,474 रुपये तथा पौधों के लिए लगभग 8.29 लाख रुपये का प्रावधान बताया गया है। उन्होंने पूछा कि प्रताप रोड पर पौधे लगाने के लिए पर्याप्त जगह कहां है और बेंच लगाने से यातायात तथा दुकानदारों की पार्किंग पर क्या असर पड़ेगा। डॉ. कमल ने यह भी सवाल उठाया कि एस्टीमेट में सड़क की खुदाई का प्रावधान दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि परियोजना के तहत वास्तव में कौन-कौन से कार्य किए जाएंगे और उनकी लागत का निर्धारण किस आधार पर किया गया है।
सड़क पर ट्रांसफार्मर, ऊपर बिजली के तार—फिर कैसे बढ़ेगी सुंदरता?
भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि प्रताप रोड पर जगह-जगह बिजली के ट्रांसफार्मर लगे हैं और बिजली की तारें भी दिखाई देती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल फैंसी लाइटें, बेंच और पौधे लगाने से सड़क की सुंदरता बढ़ जाएगी? उन्होंने कहा कि सुंदरीकरण का विरोध करना उनका उद्देश्य नहीं है। शहर की सड़कों का सौंदर्यीकरण होना चाहिए, लेकिन योजनाएं वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। यदि सड़क पर पार्किंग की समस्या का समाधान नहीं किया गया, बिजली के बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित नहीं किया गया और दुकानदारों तथा ग्राहकों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया, तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद परियोजना अपने उद्देश्य में विफल हो सकती है।
उन्होंने सवाल किया कि जब प्रताप रोड पर पहले से ही पार्किंग की समस्या है, तो क्या परियोजना तैयार करते समय दुकानदारों और ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई गई है? क्या बिजली के ट्रांसफार्मरों और तारों को व्यवस्थित करने की योजना है? और क्या काम वास्तव में उसी एस्टीमेट के अनुसार होगा, जिसे मंजूरी दी गई है? डॉ. कमल ने यह भी सवाल उठाया कि जिस कंपनी को यह काम सौंपा गया है, उसके टेंडर बार-बार सामने आने और अन्य कंपनियों की भागीदारी को लेकर स्थिति क्या है। उन्होंने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जरूरत बताई। इन आरोपों पर संबंधित विभाग और ठेकेदार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
सिविल अस्पताल के बाहर छह महीने से परेशानी, पार्किंग का समाधान कहां?
डॉ. हरजोत कमल ने सिविल अस्पताल के बाहर की स्थिति को लेकर भी नगर निगम पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां सुंदरीकरण के नाम पर लगभग छह महीने से केवल ईंटों की दीवार खड़ी रहने के कारण पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हुई है और आसपास के बाजार में लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि शहर में पहले से ही पार्किंग की समस्या गंभीर है। ऐसे में विकास योजनाएं बनाते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम नागरिकों, मरीजों, उनके परिजनों, दुकानदारों और ग्राहकों को परेशानी न हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि योजनाएं इस तरह तैयार की जा रही हैं, मानो मोगा में चौड़ी-चौड़ी सड़कें हों और जगह की कोई कमी न हो, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
“जनता को पता होना चाहिए कि उसका पैसा कहां खर्च हो रहा है”
डॉ. हरजोत कमल ने कहा कि उन्होंने प्रताप रोड के एस्टीमेट से जुड़े सवाल इसलिए सार्वजनिक किए हैं, ताकि मोगा की जनता को प्रस्तावित खर्च और कार्यों की वास्तविक जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि परियोजना में सब कुछ नियमानुसार और उचित दरों पर हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी उठाएंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि सुंदरीकरण के नाम पर तैयार किए गए एस्टीमेट में दर्शाई गई लागत और कार्यों का आधार क्या है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी या किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अमित शाह के संदेश का हवाला देकर बोले—पंजाब को लूट से बचाना होगा
डॉ. हरजोत कमल ने पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई का जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मुक्त कराने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और गलत कार्यों को उजागर करने वालों को किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव का सामना करना पड़े, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए। उन्होंने विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. कमल ने कहा कि पंजाब को मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी है। नगर निगम हो या कोई अन्य सरकारी विभाग, जनता के पैसे से होने वाले प्रत्येक कार्य का हिसाब जनता को मिलना चाहिए। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रताप रोड के सुंदरीकरण का ₹1.72 करोड़ का एस्टीमेट किन आधारों पर तैयार किया गया, प्रस्तावित कार्यों की लागत कितनी उचित है और क्या परियोजना से व्यापारियों व आम नागरिकों की समस्याओं का वास्तविक समाधान होगा? इन सवालों पर नगर निगम का आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
📍 Location: मोगा

