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पंजाब में अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से होगा ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट, पंजाब सरकार ने शुरू की एचएएमएस तकनीक

Driving license tests in Punjab

Driving license tests in Punjab

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। अब ड्राइविंग टेस्ट के दौरान सर्वर की समस्या या लंबी प्रतीक्षा जैसी परेशानियां काफी हद तक कम होंगी। पंजाब सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक सिस्टम लागू कर रही है। इस नई तकनीक को एचएएमएस (हारनेसिंग ऑटोमोबाइल फॉर सेफ्टी) नाम दिया गया है।

क्या है एचएएमएस तकनीक?

एचएएमएस एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट सिस्टम है, जिसका उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट को पूरी तरह स्वचालित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है। इस तकनीक में ड्राइविंग टेस्ट के दौरान मानवीय हस्तक्षेप को काफी कम कर दिया जाएगा। सबसे पहले टेस्ट देने वाले आवेदक की पहचान आधुनिक तकनीकों के जरिए की जाएगी। इसके लिए फेस स्कैन, आइरिस स्कैन और बायोमेट्रिक सत्यापन का उपयोग होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि टेस्ट वही व्यक्ति दे रहा है, जिसने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा ड्राइविंग का मूल्यांकन

पहचान सत्यापित होने के बाद आवेदक को ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर वाहन चलाना होगा। इस ट्रैक पर कई हाई-टेक कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो वाहन की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम वाहन की स्पीड, लेन का सही उपयोग, पार्किंग, वाहन पर नियंत्रण, मोड़ लेने का तरीका और ट्रैफिक नियमों के पालन जैसी कई बातों का स्वतः विश्लेषण करेगा। पूरे टेस्ट के दौरान किसी अधिकारी द्वारा अंक देने की आवश्यकता नहीं होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वयं प्रदर्शन के आधार पर अंक देगा और टेस्ट पूरा होते ही पास या फेल का परिणाम जारी कर देगा।

एचएएमएस से क्या होंगे फायदे?

-इस नई व्यवस्था से ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट पहले की तुलना में अधिक तेज, सरल और पारदर्शी होगा।
-ड्राइविंग टेस्ट का मूल्यांकन पूरी तरह तकनीक के आधार पर होगा, जिससे निष्पक्षता बढ़ेगी।
-केवल सही तरीके से वाहन चलाने वाले योग्य आवेदकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिलने में मदद मिलेगी।
-सर्वर संबंधी दिक्कतों और लंबी प्रतीक्षा का समय कम होने की उम्मीद है।
-किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा आवेदक की जगह टेस्ट देने जैसी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
-परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली अधिक आधुनिक और प्रभावी बनेगी।
-बेहतर ड्राइविंग कौशल वाले चालकों को लाइसेंस मिलने से सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

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