पंजाब डेस्क: चंडीगढ़ शहर में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने स्पष्ट किया है कि कम आबादी वाले शहर के लिए महंगी अंडरग्राउंड मेट्रो व्यावहारिक समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रिक बस सेवा का विस्तार कर नागरिकों को मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जा सकती है , जो मेट्रो की तुलना में अधिक किफायती विकल्प साबित होगा।
मेट्रो की जगह इलेक्ट्रिक बसों पर जोर
प्रशासक के अनुसार, लगभग 12 लाख की आबादी वाले शहर में मेट्रो परियोजना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो सकती है। इसके बजाय सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े को बढ़ाने पर है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले वर्ष तक शहर की पूरी बस सेवा को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित कर दिया जाए।
आरडब्ल्यूए के साथ हर महीने बैठक का फैसला
क्राफ्ड (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों की फेडरेशन) की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रशासक ने घोषणा की कि अब हर महीने आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक की जाएगी, जिसमें संबंधित विभागों की मौजूदगी में समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाएगा।
जनभागीदारी और जिम्मेदारी पर जोर
बैठक के दौरान प्रशासक ने नागरिकों से अपील की कि सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहन का उपयोग कम कर पैदल या साइकिल से यात्रा करें, ताकि शहर की वास्तविक समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके। उन्होंने जल संरक्षण पर भी जोर देते हुए पानी की बर्बादी रोकने की अपील की।
सड़कों और बुनियादी ढांचे पर काम तेज
प्रशासन ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार से 125 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जिससे टूटी सड़कों के सुधार कार्य में तेजी लाई जा रही है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और पारदर्शिता के साथ समय पर निर्णय लिए जाएं।
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अवैध निर्माण और हाउसिंग बोर्ड पर सख्ती
हाउसिंग बोर्ड से जुड़े मामलों पर प्रशासक ने कहा कि केवल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है और कोर्ट के आदेशों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जहां संभव होगा, लोगों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।बैठक में आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने 85 प्रतिशत स्थानीय आरक्षण और शहर के प्रशासनिक ढांचे में सुधार से जुड़े सुझाव भी रखे।

