चंडीगढ़: गुरुवार को देशभर के बिजली कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ में बिजली के निजीकरण के फैसले को रद्द करने और वापस लेने की मांग की। देशभर के बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर यूपी में बिजली के निजीकरण के लिए कोई एकतरफा कार्रवाई की गई तो बिना कोई नोटिस दिए वे आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
वी.के. गुप्ता ने बताया कि पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, असम, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और अन्य राज्यों में विरोध सभाएं की गईं। चंडीगढ़ बिजली विभाग और उत्तर प्रदेश के निजीकरण की प्रक्रिया के खिलाफ यूटी चंडीगढ़ बिजली कर्मियों के संघर्ष के समर्थन में पावरकॉम इंजीनियरों और कर्मचारियों ने हेड ऑफिस पटियाला में विरोध रैली सभा को संबोधित करने वालों में एआईपीईएफ के मुख्य संरक्षक पदमजीत सिंह और पीएसईबीईए के वित्त सचिव देविंदर गोयल शामिल थे।
शैलेंद्र दुबे चेयरमैन एआईपीईएफ और संयोजक संयुक्त मंच ने कहा कि किसी भी कीमत पर बिजली का निजीकरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और निजीकरण का फैसला वापस होने तक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे। चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों ने जनवरी की शुरूआत से ही काम का बहिष्कार करने का फैसला किया है, ऐसा महासचिव गोपाल जोशी ने कहा। असम में इंजीनियरों ने राज्य के विद्युत मंत्री से मुलाकात कर उन्हें उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ के विकास से अवगत कराया।

