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तीन माह से वेतन लंबित, कर्मचारियों पर कार्रवाई से भड़के दादूवाल

Employees’ salaries pending for three months : अमृतसर। मीरी-पीरी संस्थान में तीन माह से लंबित वेतन को लेकर कर्मचारियों और चिकित्सकों की ओर से आवाज उठाने के बाद कथित कार्रवाई का मामला गरमा गया है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के धर्म प्रचार कमेटी चेयरमैन जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने प्रबंधन पर कर्मचारियों के साथ ज्यादती का आरोप लगाते हुए निलंबन, बर्खास्तगी और कारण बताओ नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो एचएसजीएमसी सदस्यों के साथ मिलकर रोष प्रदर्शन किया जाएगा।

जत्थेदार दादूवाल ने संस्थान के सीईओ डॉ. संदीप इंद्र सिंह चीमा एवं ट्रस्ट प्रबंधन से कहा कि कर्मचारियों एवं चिकित्सकों के साथ कथित ज्यादती बंद की जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी तीन माह तक सेवाएं देने के बाद अपने मेहनताने की बात कर रहे हैं। वेतन मांगना किसी कर्मचारी का अपराध नहीं, बल्कि उसका जायज अधिकार है। दादूवाल के अनुसार, गत 3 जुलाई को मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रधान प्रितपाल सिंह, कोषाध्यक्ष तरसेम सिंह सहित 11 सदस्यीय कमेटी और तीन वरिष्ठ चिकित्सकों ने कर्मचारियों की अगुवाई में तीन माह के लंबित वेतन के भुगतान को लेकर रोष प्रदर्शन किया था। उनका आरोप है कि कर्मचारियों द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद कुछ स्टाफ सदस्यों और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने बताया कि एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरविंद टिक्कों को नौकरी से हटाया गया है, जबकि दो चिकित्सकों सहित अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

दादूवाल ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना कार्रवाई करना निष्पक्ष प्रक्रिया के विपरीत है। मोटरसाइकिल मामले में भी उठाए सवाल : दादूवाल ने कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रधान प्रितपाल सिंह एवं कोषाध्यक्ष तरसेम सिंह के निलंबन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों पर कर्मचारी विकास कुमार की मोटरसाइकिल चोरी के मामले में सुरक्षा ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया गया है, जबकि स्टाफ विकास कुमार ने शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि वह किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी से कोई क्लेम नहीं करना चाहते और इसे अपनी व्यक्तिगत गलती मानते हैं। ऐसे में इस मामले को आधार बनाकर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का औचित्य क्या है, यह प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए। दादूवाल ने पांच कर्मचारियों एवं दो चिकित्सकों को जारी कारण बताओ नोटिस को भी कथित तौर पर अस्पष्ट बताते हुए कहा कि आरोप स्पष्ट किए बिना कर्मचारियों से जवाब मांगना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित प्रतीत होती है। दादूवाल ने डॉ. चीमा एवं ट्रस्ट के सदस्यों को नसीयत देते हुए कहा कि संस्थाएं किसी व्यक्ति की निजी जागीर की तरह नहीं, बल्कि तय नियमों, पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर चलती हैं।

उन्होंने कहा कि इतिहास में हिटलर और औरंगजेब जैसे शासकों ने व्यवस्थाओं को अपनी व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार चलाने की कोशिश की, जिसका परिणाम दमन, असंतोष और अंततः व्यवस्था के कमजोर होने के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि संस्थाएं डर और दबाव से नहीं, बल्कि विश्वास, नियम और न्याय से मजबूत होती हैं। जत्थेदार दादूवाल चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों कर्मचारियों का निलंबन, डॉ. अरविंद टिक्कों को हटाने की कार्रवाई तथा कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को जारी नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं और कर्मचारियों एवं चिकित्सकों का लंबित वेतन जारी किया जाए। दादूवाल ने कहा कि अगर जल्द पीड़ितों को राहत नहीं मिली तो एचएसजीएमसी सदस्यों के साथ मिलकर पीड़ित स्टाफ एवं चिकित्सकों के समर्थन में रोष प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में वह उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

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