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पुरानी पेंशन और वेतन बढ़ोतरी समेत मांगों पर अड़े कर्मचारी

Employees to Observe Mass Casual Leave on 21–22 : मोगा। पंजाब सरकार के खिलाफ कर्मचारियों और पेंशनरों का आंदोलन तेज हो गया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब ने घोषणा की है कि 21 और 22 अक्टूबर को राज्य के स्कूलों का समूचा स्टाफ सामूहिक छुट्टी लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा।

संगठन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ओर से मांगों के समाधान के लिए बैठक का आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने और लंबित महंगाई भत्ता जारी करने सहित कई मांगें उठाई हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब ने भी घोषणा की है कि इन दोनों दिनों में राज्य के स्कूलों का समूचा स्टाफ सामूहिक छुट्टी पर रहेगा। इसके चलते सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और अन्य कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। डीटीएफ पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय पाल शर्मा, मोगा जिला प्रधान सुखपालजीत सिंह और कार्यकारी जिला सचिव सुखविंदर सिंह घोलियां ने बताया कि कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन अभी तक मांगों का समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले 27 अगस्त को भी पंजाब के लगभग 80 प्रतिशत शिक्षकों ने सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन में भाग लिया था। मुख्यमंत्री के साथ बैठक का वादा पूरा नहीं होने का आरोप डीटीएफ नेताओं के अनुसार, 18 सितंबर को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में कर्मचारियों के साथ बैठक करके उनकी मांगों का समाधान किया जाएगा। हालांकि, संगठन का कहना है कि अभी तक बैठक के लिए कोई निमंत्रण नहीं मिला है। इसी कारण कर्मचारियों में रोष है और आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

जिला वरिष्ठ उपप्रधान गुरमीत सिंह झोरड़ा और उपप्रधान स्वर्ण दास ने बताया कि कर्मचारियों और पेंशनरों की कई प्रमुख मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इनमें पुरानी पेंशन योजना बहाल करना, 17 जुलाई 2020 और 15 जनवरी 2015 के पत्र रद्द करना, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना, मिड-डे मील वर्करों, आशा वर्करों और आंगनवाड़ी वर्करों का न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनरों को 2.59 का गुणांक देने, 10 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता जारी करने, एसीपी योजना लागू करने और ग्रामीण भत्ता बहाल करने की मांग भी उठाई गई है।

विधानसभा चुनाव में भी उठाएंगे मुद्दे जिला संयुक्त सचिव अमनदीप माछीके और वित्त सचिव गुरशरण सिंह ने कहा कि जब तक कर्मचारियों की सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर एकजुटता के साथ आंदोलन में शामिल हों। नेताओं ने यह भी कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से कर्मचारियों की मांगों को लेकर सवाल किए जाएंगे। इस अवसर पर अमरदीप सिंह बुट्टर, जगजीत सिंह रणियां, नरेंद्र सिंह, मोटू वर्मा, नछत्तर सिंह, दीपक मित्तल, ममता कौशल सहित जिला कमेटी के अन्य सदस्य मौजूद थे।

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