खन्ना : हरियाणा के गांव होंद चिल्लड़ में नवंबर 1984 के दौरान हुए सिख कत्लेआम का दर्द 42 साल बाद भी पीड़ित परिवारों के दिलों में जिंदा है। इतने लंबे समय बाद भी पीड़ित परिवारों को पूरा इंसाफ नहीं मिल पाया है। इसी दर्द को याद करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए बुधवार को होंद चिल्लड़ की धरती पर विशेष धार्मिक समागम करवाया गया। इस मौके पर श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए और गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
संगत ने अरदास कर बिछड़ी रूहों की शांति और पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिलने की कामना की। साथ ही संकल्प लिया कि जब तक पीड़ित परिवारों को इंसाफ नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।इस मौके पर होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी के प्रधान और पंजाब के पायल से विधायक इंजीनियर मनविंदर सिंह ग्यासपुरा, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा, 1984 के कत्लेआम में अपने परिवार के 12 सदस्यों को खोने वाली सुरजीत कौर रेवाड़ी सहित विभिन्न सिख संगठनों के प्रतिनिधि और संगत मौजूद रही। समागम में सुरजीत कौर रेवाड़ी ने अपने परिवार के साथ हुई दर्दनाक घटना साझा की।
उन्होंने बताया कि 1984 के कत्लेआम के दौरान उनके परिवार के 12 सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। इनमें उनके दादा गुरदयाल सिंह, दादी जमना बाई, पिता अर्जन सिंह, माता प्रीतम कौर, दो छोटे भाई जसबीर सिंह और सतबीर सिंह, तीन बुआ जोगिंदर कौर, जसबीर कौर और सुनीता देवी तथा तीन चाचा महिंदर सिंह, गुरचरण सिंह और ज्ञान सिंह शामिल थे। उनके दोनों छोटे भाई उस समय महज दो और तीन साल के थे। सुरजीत कौर ने 18 मई 2013 को अपने परिवार के मारे गए 12 सदस्यों की सूची जस्टिस टीपी गर्ग आयोग के सामने भी पेश की थी।
विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने अपने संबोधन में 1984 के सिख कत्लेआम के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि होंद चिल्लड़ में 2 नवंबर 1984 को सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक हिंसा का दौर चला। उनके अनुसार इस दौरान 32 सिखों की हत्या की गई, घरों और हवेलियों को आग लगा दी गई और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को नहीं बख्शा गया। उन्होंने कहा कि 42 साल बीतने के बावजूद पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए भटक रहे हैं।
ग्यासपुरा ने भाजपा सरकार को भी सवालों के घेरे में लेते हुए कहा कि हरियाणा में भाजपा को सत्ता में आए 10 साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के मामले में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक पार्टी के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि सच्चाई सामने लाने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई है।
उन्होंने दोहराया कि होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी का संघर्ष इंसाफ मिलने तक जारी रहेगा।हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता जताई। इस मौके पर सरपंच प्रगट सिंह सियाड़, मिगा जर्मन, चरणजीत चन्नी, दलविंदर सरपंच, मनजीत डीसी और गुरजंट सिंह खालसा सहित कई सिख नेता और संगत मौजूद रही। होंद चिल्लड़ कांड को दुनिया के सामने लाने में इंजीनियर मनविंदर सिंह ग्यासपुरा की अहम भूमिका रही।
22 जनवरी 2011 को उन्हें इस उजड़े गांव के बारे में जानकारी मिली। गांव पहुंचकर जले हुए घरों और तबाही के निशान देखने के बाद उन्होंने इस मामले को लोगों के सामने लाने का फैसला किया। 24 जनवरी 2011 को उन्होंने तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिसके बाद यह मामला बड़े स्तर पर चर्चा में आया। 23 फरवरी 2011 को श्री अकाल तख्त साहिब के तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने गांव का दौरा किया। इसके बाद 5 मार्च 2011 को हरियाणा सरकार ने जांच के लिए जस्टिस टीपी गर्ग आयोग बनाया।समागम के अंत में संगत ने कहा कि होंद चिल्लड़ के शहीदों की याद को जिंदा रखना और पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए आवाज उठाना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। सभी ने संकल्प लिया कि इंसाफ मिलने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा।

