
Faridkot School Organises Seminar on Stubble Management : फरीदकोट। पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण और मिट्टी की घटती उपजाऊ शक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए झोटियांवाला के सूबेदार मोहिंदर सिंह मेमोरियल सरकारी स्कूल में सेमिनार आयोजित किया गया। डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा के मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर केशव गोयल, मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह, शिक्षक, छात्र और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि मशीनों और वैज्ञानिक तकनीकों से पराली प्रबंधन करने की अपील की। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ जागरूकता रैली भी निकाली गई।
फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा के मार्गदर्शन और झोटियांवाला स्थित सूबेदार मोहिंदर सिंह मेमोरियल सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल एस. निर्मल सिंह बुट्टर की पहल पर, स्कूल में फसल अवशेषों के सही प्रबंधन को लेकर एक जागरूकता सेमिनार रखा गया। फरीदकोट के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) केशव गोयल ने मुख्य अतिथि के रूप में इस सेमिनार में भाग लिया। कार्यक्रम में स्कूल के सभी शिक्षक, छात्र और स्थानीय क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।
सेमिनार के दौरान, फरीदकोट के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह ने छात्रों और किसानों के साथ अपने विचार साझा करते हुए बताया कि फसल अवशेषों—खासकर धान की पराली—को जलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर बुरा असर पड़ता है और इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। यह आदत इंसानों, जानवरों, पक्षियों और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक कृषि मशीनों और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके पराली का सही प्रबंधन करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान मिल सके।
इस मौके पर कृषि विभाग के सहायक मार्केटिंग अधिकारी ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को बचाना, अपने आस-पास सफाई रखना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों का सही प्रबंधन करने से मिट्टी की सेहत सुधरती है और पर्यावरण भी साफ रहता है। स्कूल के प्रिंसिपल एस. निर्मल सिंह बुट्टर ने कहा कि आज के समय में छात्रों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को लेकर जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने परिवारों और स्थानीय किसानों तक यह संदेश पहुंचाएं कि पराली न जलाई जाए, ताकि सामूहिक प्रयासों से प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके बाद, छात्रों के लिए भाषण, कविता, पेंटिंग और क्विज़ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के जरिए छात्रों को पराली प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। सेमिनार के समापन पर, छात्रों और पूरे स्टाफ ने गाँव में एक जागरूकता रैली निकाली।
मेष: दिन शुभ रहेगा...