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पराली जलाने पर रोक के लिए किसान जागरूक, शहीद गांव में प्रशिक्षण शिविर

Farmer Training Camp Held in Tarn Taran : अमृतसर। तरनतारन के पट्टी क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग का जागरूकता अभियान जारी है। हॉटस्पॉट गांव शहीद में आयोजित किसान प्रशिक्षण शिविर में विशेषज्ञों ने किसानों को पराली प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण, बीज उपचार और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।

शिविर को संबोधित करते हुए, ब्लॉक कृषि अधिकारी (पट्टी) डॉ. भूपिंदर सिंह ने कहा कि खेत में ही फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है, खरपतवार की वृद्धि रुकती है, सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पराली को जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके उसका प्रबंधन करें, क्योंकि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं इंसानी सेहत, वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक होता है। फार्म एडवाइजरी सर्विस सेंटर की प्रमुख डॉ. परमिंदर कौर ने बीज उपचार और फसलों को संभावित बीमारियों व कीटों से बचाने के महत्व के बारे में जानकारी दी।

ADO (मिट्टी परीक्षण) डॉ. हरमदीप कौर ने मिट्टी के नमूने लेने की प्रक्रिया और मिट्टी परीक्षण के महत्व को समझाया, साथ ही विभाग द्वारा सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध जिप्सम के बारे में भी जानकारी दी। सर्कल इंचार्ज AEO हरकीरत सिंह ने ‘किसान ID’ बनाने की प्रक्रिया समझाई। इस मौके पर किसानों को घर के बगीचों के लिए विभिन्न सब्जियों के बीज वाली किट और कृषि संबंधी साहित्य वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को बताया कि नवंबर का पहला पखवाड़ा गेहूं की बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय है, जबकि 30 अक्टूबर गोभी सरसों (रेपसीड/सरसों) की बुवाई के लिए उपयुक्त समय सीमा है।

इस कैंप की सफलता सरपंच मनदीप सिंह, सरबिंदर सिंह, दविंदर सिंह, किसान नेता बलदेव सिंह, एग्रीकल्चर सब-इंस्पेक्टर बाजा सिंह, गुरदेव सिंह सरहाली, एग्रीकल्चर असिस्टेंट मैनेजर गुरदेव सिंह मानकपुरा, फील्ड वर्कर दिलबाग सिंह, फतेह सिंह और बड़ी संख्या में किसानों के सहयोग से संभव हो पाई।

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