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पराली नहीं कचरा, किसानों के लिए अनमोल संसाधन

Farmer Turns Paddy Stubble into Livestock Bedding and Fodder : अमृतसर। सभरा गाँव के किसान रचपाल सिंह ने पराली प्रबंधन में एक मिसाल कायम की है—वे 8 एकड़ ज़मीन से पराली इकट्ठा करते हैं और उसका इस्तेमाल पशुओं के बिछावन (बेडिंग) और चारे के रूप में करते हैं।

जो किसान मिट्टी, पानी, हवा और जैव विविधता के महत्व को समझते हैं, वे फसल की पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए कई पारंपरिक और आधुनिक तरीकों को अपना रहे हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण सभरा गाँव के प्रगतिशील किसान रचपाल सिंह हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों और खेत के मजदूरों की मदद से पिछले कुछ वर्षों से लगभग 8 एकड़ ज़मीन से पराली इकट्ठा कर रहे हैं। वे इस पराली का इस्तेमाल अपने पशुओं के लिए बिछावन और चारे के तौर पर करते हैं। उनके अनुभव के अनुसार, पराली का इस तरह से सही इस्तेमाल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है, बल्कि इससे खेती और पशुपालन दोनों को फायदा होता है।

यह पशुओं के लिए बिछावन और चारे का एक उपयोगी स्रोत बन जाता है। रचपाल सिंह और उनके परिवार के सदस्य—चरण सिंह, जसपाल सिंह, सुरिंदर सिंह और इंद्रजीत सिंह—का मानना ​​है कि फसल के अवशेष (पराली) केवल कचरा नहीं हैं; बल्कि सही प्रबंधन से इन्हें किसानों के लिए एक मूल्यवान संसाधन में बदला जा सकता है। उनकी यह पहल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो दिखाती है कि पराली को जलाने के बजाय, उसका सही इस्तेमाल करके खेती, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। इस मौके पर, पट्टी के ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने रचपाल सिंह और उनके परिवार के प्रयासों की खूब सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसी पहल पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी अपील की कि वे अपने संसाधनों और खेती की परिस्थितियों के हिसाब से पराली प्रबंधन के सही तरीके अपनाएं, ताकि मिट्टी, पानी, हवा और जैव विविधता को बचाया जा सके और फसल के अवशेषों को जलाने से बचा जा सके।

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