Farmers begin permanent sit-ins outside DC offices. : मोगा। विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां समेत किसान संगठनों ने रविवार से पंजाब भर के जिला मुख्यालयों में डीसी कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरने शुरू कर दिए। मोगा में भी किसानों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पराली मामलों की एफआईआर रद्द करने और भूमि पूलिंग नीति वापस लेने समेत 13 मांगें उठाईं। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
मोगा में भी किसानों ने डीसी कार्यालय के बाहर एकत्र होकर केंद्र सरकार की किसान नीतियों के खिलाफ रोष जताया। धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण किसान, खेत मजदूर, छोटे व्यापारी और छोटे उद्योग लगातार आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार की ओर से ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनका सीधा असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
किसान नेताओं ने कहा कि संगठन की ओर से कुल 13 प्रमुख मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया गया है। इनमें किसानों और मजदूरों के कर्ज के स्थायी समाधान, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, पराली से संबंधित एफआईआर रद्द करने तथा भूमि पूलिंग नीति को रद्द करने जैसी मांगें प्रमुख हैं।
संगठन पहले भी इन मांगों को लेकर जिला स्तर पर लामबंदी कर चुका है। धरने के दौरान किसान नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। नेताओं का कहना था कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद कम कीमत पर भारतीय बाजार में आने लगे तो इसका सीधा असर देश के किसानों की फसलों की मांग और कीमतों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी, पशुपालन, मछली पालन, छोटे कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य वर्ग भी प्रभावित हो सकते हैं। किसान संगठन इस प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग पहले भी उठा चुका है। किसान नेताओं ने भूमि पूलिंग नीति का विरोध करते हुए कहा कि किसानों की जमीनों को किसी भी ऐसी नीति के तहत नहीं लिया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में उनका मालिकाना और खेती पर नियंत्रण प्रभावित हो।
उन्होंने मांग की कि किसानों की जमीन और उनके अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाए। इसके साथ ही उन्होंने जमीन पर खेती करने वाले काश्तकारों को मालिकाना हक देने की मांग भी उठाई। पानी के मुद्दे पर किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब के नदी जल से संबंधित मामलों का समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लोगों के बीच विवाद पैदा करने के बजाय पानी के मुद्दे का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की। संगठन की मांगों में पानी के संसाधनों पर कॉरपोरेट नियंत्रण खत्म करने, खेतों तक सुनिश्चित नहरी पानी पहुंचाने और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने की मांग भी शामिल है।
किसान नेताओं ने कहा कि पिछले किसान आंदोलनों तथा पराली जलाने से संबंधित किसानों पर दर्ज मामलों को बिना शर्त वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा किसान परिवारों के कर्ज का समाधान और प्रभावित परिवारों को उचित राहत देने की मांग भी उठाई गई। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि डीसी कार्यालयों के बाहर लगाए गए ये मोर्चे अनिश्चितकालीन होंगे। उन्होंने कहा कि धरने कब समाप्त किए जाएंगे, इसका फैसला सरकार के रवैये पर निर्भर करेगा। जब तक सरकार किसानों की प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है

