Farmers’ Groups to Meet Over Punjab Drug Crisis : मोगा। पंजाब में नशे के बढ़ते प्रकोप और युवाओं की मौतों समेत विभिन्न मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर की ओर से 27 सितंबर को चंडीगढ़ के किसान भवन में संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इसमें किसान, मजदूर, कर्मचारी, पंथक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
इस बैठक में पंजाब के विभिन्न किसान, मजदूर, कर्मचारी, पंथक तथा अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। संगठन के जिला प्रधान लवजीत सिंह ददाहूर ने सभी संबंधित जत्थेबंदियों और पंजाब के विभिन्न वर्गों से बैठक में पहुंचकर अपने सुझाव देने की अपील की है। लवजीत सिंह ददाहूर ने कहा कि पंजाब में नशे का मुद्दा बेहद गंभीर रूप धारण कर चुका है और इसका सबसे अधिक प्रभाव प्रदेश की युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं और युवाओं की मौतों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि नशे की रोकथाम के नाम पर छोटी मात्रा में नशा रखने या सेवन करने वाले युवाओं के खिलाफ बड़ी संख्या में मामले दर्ज कर गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जबकि उनके अनुसार नशे की सप्लाई के बड़े नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। ददाहूर ने पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर अत्याचार किए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नशे से होने वाली मौतों के मामलों में यदि किसी परिवार की ओर से पुलिस या अन्य पक्षों पर आरोप लगाए जाते हैं तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई पर प्रभावी रोक लगाने और समस्या के मूल कारणों पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 27 सितंबर को होने वाली बैठक में पंजाब की जवानी, किसान वर्ग, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में मौजूदा परिस्थितियों को लेकर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के विचार और सुझाव लिए जाएंगे तथा भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। ददाहूर ने कहा कि बैठक का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि पंजाब के मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करते हुए विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाना और पंजाब के भविष्य को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की युवा पीढ़ी और किसान वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर सभी वर्गों को मिलकर आवाज उठाने की जरूरत है। उन्होंने पंजाब के किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, पंथक जत्थेबंदियों, छोटे व्यापारियों और समाज के अन्य वर्गों से अपील की कि वे 27 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में चंडीगढ़ के किसान भवन पहुंचें और बैठक में अपने सुझाव रखें। उन्होंने कहा कि सभी संगठनों के विचारों के आधार पर पंजाब की जवानी और किसान वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति और संघर्ष का फैसला किया जाएगा।