
मोगा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों ने मोगा में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना देकर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाए। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने काटे गए वोटों की दोबारा जांच, पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर मांगपत्र सौंपा।
इस दौरान किसान नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने पर चिंता जताई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, काटे गए वोटों की दोबारा जांच और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों में बहाल करने की मांग की। धरने के बाद अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों के माध्यम से मांगपत्र भी भेजा गया। धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि मतदाता सूचियों की समीक्षा के नाम पर की जा रही कार्रवाई को लेकर लोगों में चिंता है। उनका आरोप था कि कई स्थानों पर पात्र लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि मतदान करना प्रत्येक पात्र नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। किसान नेता बलौर सिंह ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और उन्हें बहाल किए जाने से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूचियों की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। साथ ही चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आने पर नियमानुसार दोबारा चुनाव करवाने की मांग भी उठाई।
एक अन्य किसान नेता ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध रखने वाले लोगों के वोट काटे जाने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस मामले में समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। किसान नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भारतीय किसान यूनियन लाखोवाल के किसान नेता भूपिंदर सिंह लाखोवाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर के जिला मुख्यालयों पर धरने दिए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में भी आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित रहना जरूरी है। धरने के अंत में किसान नेताओं ने अपनी मांगों से संबंधित मांगपत्र डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के माध्यम से सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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